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दून में प्लॉट खरीदने से पहले MDDA से ये जरूर पूछें

Sat, 10 Oct 2015 12:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 10 Oct 2015 12:16 PM IST
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fraud in property dealing in dehradun.

अगर आप दून में प्लॉट खरीद रहे हैं तो एमडीडीए से इन बातों की जानकारी जरूर ले लें वरना इन्हीं की तरह परेशानी उठानी पड़ेगी।

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केस-एक
नेहरू कॉलोनी निवासी सुनील पांथरी ने एक साल पहले शिमला बाईपास से लगे इलाके में एक प्लॉट खरीदा। कॉलोनाइजर ने उसे हर तरह की सुविधा देने का दावा किया। जब सुनील ने उस जमीन पर मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने को एमडीडीए में दिया, तो अप्रूव्ड कॉलोनी न होने का हवाला देते हुए उसका नक्शा रोक दिया गया। अब सुनील उस जमीन को बेचकर दूसरी जगह लेने की सोच रहा है।

केस-दो
सहस्त्रधारा रोड निवासी विक्रम पुंज ने मसूरी रिंग रोड बाईपास से लगे क्षेत्र में प्लॉट लिया। उसने मकान बनाने के लिए नक्शा बनवाया तो एमडीडीए ने रोड की चौड़ाई कम होने की बात कहते हुए पास करने से इंकार कर दिया। जिस आदमी ने प्लॉट बेचा वह विदेश जा चुका है। विक्रम को जमीन का बड़ा हिस्सा सड़क के लिए काटना पड़ रहा है।
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ऊपर दिए गए दोनों मामले केवल बानगी भर हैं। बिना जानकारी के प्लॉट खरीदने वाले सैकड़ों लोग इन दिनों एमडीडीए के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जमीन बेचने वाला प्रॉपर्टी डीलर या कालोनाइजर लोगों को अंधेरे में रखकर जमीन बेच देता है। इसके बाद परेशान लोगों को नक्शा पास करवाने, जमीन का लैंड यूज चेंज कराने और अन्य औपचारिकताओं के लिए एमडीडीए के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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एमडीडीए में बड़ी संख्या में ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मामले नया मास्टर प्लान लागू होने से पहले खरीदी गई जमीनों के हैं। नए मास्टर प्लान के अनुसार जमीनों का लैंड यूज, सड़क व अन्य मानकों में खासा बदलाव हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों ने पहले जमीन खरीदी अब जब वह नक्शा पास करवाने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।

प्लॉट खरीदने के पहले इन बातों का रखें ध्यान

fraud in property dealing in dehradun.

-जमीन का लैंड यूज अनिवार्य रूप से जांचें।
-जमीन के स्वामित्व की जांच करें।
-कॉलोनी एमडीडीए से अप्रूव्ड है या नहीं यह देखें।
-जिस उपयोग के लिए जमीन ले रहे हैं, उसकी जांच जरूर करें।
-मास्टर प्लान में निर्मित क्षेत्र की जानकारी जरूर लें।

महंगा पड़ेगा सब डिविजन चार्ज
अनाधिकृत कॉलोनी में मकान खरीदने पर सब डिविजन चार्ज के रूप में सर्किल रेट का पांच फीसदी भुगतान करना होता है। ज्यादातर खरीदार दाम कम होने के लालच में ऐसी कॉलोनी में मकान खरीद लेते हैं। बाद में उन्हें इसका पूरा भुगतान करना पड़ता है। ऐसी कॉलोनी में 100 मीटर की परिधि में 50 से 60 फीसदी मकान बनने के बाद ही नक्शे पास होते हैं। इसमें सामान्य तौर पर 8 से 10 साल का वक्त लग जाता है।

इनका है कहना
हम हर जमीन खरीदने वाले से पहले पूरी जांच-परख करने की अपील करते हैं। ज्यादातर मामलों में बेचने वाला लोगों को सही जानकारी नहीं देता। ऐसे में खरीदने वाले को अनावश्यक चक्कर काटने पड़ते हैं। लैंड यूज, स्वामित्व, कॉलोनी के अप्रूवल जैसे मामलों को अनिवार्य रूप से जांचना चाहिए।
-पीसी दुम्का, सचिव एमडीडीए

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