फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   four workers buried in rubble in uttarakhand.

उत्तराखंडः मलबे में जिंदा दफन हुए झारखंड के चार मजदूर

Wed, 17 Dec 2014 01:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर Updated Wed, 17 Dec 2014 01:07 PM IST
विज्ञापन
four workers buried in rubble in uttarakhand.

उत्तराखंड के मलेथा में पुश्ता निर्माण के दौरान मलबे में दबने से झारखंड निवासी चार मजदूरों की मौत हो गई। चार घंटे की मशक्कत के बाद मलबे में दबे चारों मजदूरों के शव निकाल लिए गए। ये सभी गांव फुलजोरा जिला दुमका झारखंड के निवासी थे।

विज्ञापन


श्रीनगर से दस किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलेथा के समीप करीब दो माह से एक निजी भूखंड में निर्माण चल रहा था। मंगलवार को 10 मजदूर भूखंड पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पुश्ता निर्माण का काम कर रहे थे।
विज्ञापन


इनमें चार नींव के अंदर नींव खोदने का कार्य कर रहे थे जबकि बाकी 6 मजदूर थोड़ी दूर पर पत्थरों को ढोने व बनाने का काम कर रहे थे।

करीब साढ़े बारह बजे अचानक सड़क के किनारे का हिस्सा भरभराकर मजदूरों के ऊपर आ गिरा। काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

जेसीबी से मलबा हटाकर निकाले गए शव

four workers buried in rubble in uttarakhand.

मलेथा में पुश्ता निर्माण के दौरान मलबे में मजदूरों के दबने की सूचना मिलते ही आस-पास के लोग दौड़ पड़े। लोगों ने बेलचे और फावड़ों से मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, मलबा इतना ज्यादा था क‌ि लोग मलबा हटाते रहे लेकिन शवों का पता नहीं चल पा रहा था।

करीब एक बजे जेसीबी के पहुंचने के एक घंटे बाद मलबे से दो शव निकाले गए। तीसरा शव तीन बजे और चौथा शव करीब चार बजे निकाला गया। घटनास्थल पर एसडीएम दीपेंद्र नेगी, कोतवाल एएस रावत मय फोर्स मौजूद रहे।

जो मजदूर जिंदा दफन हो गए उनमें शंकर राय (30) पुत्र केलू राय, प्रमोद दर्वे (25) पुत्र सुरजू दर्वे, विजय राउत (50)पुत्र तुमन राउत और केशव दर्वे (25) पुत्र हुरु दर्वे थे। ये सभी मजदूर गांव फुलजोरा जिला दुमका झारखंड के निवासी थे।

पहली बार आया था गढ़वाल

four workers buried in rubble in uttarakhand.

प्रमोद दर्वे पहली बार घर से बाहर काम करने आया था। इससे पहले वह अपने गांव में ही मजदूरी करता था। प्रमोद के बड़े भाई बैजनाथ ने बताया कि वह डेढ़ माह पहले ही श्रीनगर पहुंचा था। अब वह बिना भाई के घर कैसे जाएगा।

बैजनाथ ने बताया कि घर में 70 वर्षीय मां अकेली है। जबकि शंकर राय के बड़े भाई अमित राय का भी रो- रो कर बुरा हाल है। अमित ने बताया के शंकर के घर तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। शंकर करीब 10 वर्षों से गढ़वाल में काम कर रहा था।

अचानक हुई इस घटना में अपने साथियों की मौत से वे सदमे में हैं। बदहवास से मजदूर कभी घटना स्थल पर खड़े लोगों को देख रहे थे तो कभी राहत कार्य कर रहे लोगों को। अचनाक घटी इस घटना से सुध बुध खो चुके मजदूर कुछ कह नहीं पा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed