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पूर्व सीएम रावत ने BJP के प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर किया बड़ा खुलासा, जानिए पूरा मामला

Wed, 02 Aug 2017 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 02 Aug 2017 12:53 AM IST
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Former CM Rawat told big disclosures about BJP training program in dehradun

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाल ही में हुए बीजेपी के प्रश‌िक्षण कार्यक्रम को लेकर बड़ा खुलासा क‌िया है। इस दौरान उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला। प्रश‌िक्ष‌ण कार्यक्रम में जो हुआ उसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे।

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उन्होंने खुलासा किया कि भाजपा का समागम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे को समर्पित रहा। सम्मेलन में आए सदस्यों को गोडसे की डाक्यूमेंट्री, लेख और प्रवचनों के जरिये उनकी अलग छवि दिखाने की कोशिश हुई।
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उन्होंने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इतिहास से छेड़छाड़ कर अपने तरीके से इसके पुनर्लेखन की कोशिश कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सांप्रदायिकता भारत छोड़ो’ के नारे को हास्यास्पद करार दिया। वह मंगलवार को कांग्रेस भवन में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। 

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आजादी की लड़ाई में पंडित दीन दयाल का कोई योगदान नहीं

Former CM Rawat told big disclosures about BJP training program in dehradun

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के समागम में पलायन पर बात नहीं हुई। न ही विकास और बेरोजगारी पर चर्चा हुई। सीमा पर तनाव, किसानों की लगातार हो रही आत्महत्या पर कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया। पूरा समागम गोडसे को समर्पित कर दिया गया।

​उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नारे ‘सांप्रदायिकता भारत छोड़ो’ के नारे में स्पष्ट विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि यह नारा बोलने से पहले मोदी को संघ परिवार के ऐसे सभी साम्प्रदायिक कृत्यों के लिये सार्वजनिक खेद प्रकट करना चाहिए। जब तक बजरंग दल, गौरक्षक व हिंदू युवा वाहिनी सरीखे संगठन धर्म आधारित घृणा के प्रचार में रहेंगे तब तक पीएम का कथन एक मजाक मात्र होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को स्व. दीन दयाल के विचारों का ज्ञान कराने के नाम पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम व आधुनिक भारत के निर्माण की इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखाने की कुचेष्टा हो रही है, जो निंदनीय है। उन्होंने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय का आजादी की लड़ाई और आधुनिक भारत के निर्माण में कोई योगदान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांप्रदायिक आधारित सोच के ध्वजवाहक को स्वामी विवेकानंद के समकक्ष रखा जा रहा है।

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