भारत-पाक युद्ध के युद्धबंदी पूर्व एयर मार्शल बोले, चीन नहीं पाकिस्तान है देश के लिए असली खतरा
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भारत के लिए चीन से बड़ा खतरा पाकिस्तान है। चीन अब अरुणाचल को छोड़कर भारत के अन्य किसी हिस्से में विवाद नहीं कर रहा है। उत्तराखंड का जो बॉर्डर इलाका है, उस पर भी चीन ने कभी कोई क्लेम नहीं किया।
अगर उत्तराखंड में चीन की दिलचस्पी होती तो वह यहां अपनी गतिविधियां बढ़ाता लेकिन ऐसा नहीं है। साफ है कि बॉर्डर एरिया खाली होने का उस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व एयर मार्शल केसी नंदा करिअप्पा ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सीमावर्ती गांव निश्चित तौर पर चीन के खिलाफ सेकेंड बॉर्डर की तरह हैं, लेकिन यहां चीन की ज्यादा मूवमेंट नहीं है। कुछेक मामलों को छोड़ दिया जाए तो यहां चीन सीधी दखलअंदाजी भी नहीं करता।
बॉर्डर के गांव आबाद रहे तो बेहतर है लेकिन अगर यह खाली भी हों तो बड़ा खतरा नहीं बनेंगे। इसके बजाय भारत की चिंता पाकिस्तान को लेकर होनी चाहिए। पाकिस्तान में जिस तरह के हालात हैं, वहां सेना कभी भी मनमानी कर सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सेना पर किसी का नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि कोई जनरल अपना कार्यकाल बढ़ा देता है तो कोई तख्ता पलटा देता है।
बांटने पर था पाकिस्तान का जोर
केसी नंदा करिअप्पा ने बताया कि वर्ष 1965 युद्ध के दौरान उन्हें कई अन्य भारतीय सैनिकों के साथ कैद कर लिया गया था। तब पाकिस्तान का पूरा जोर भारतीय सैनिकों को आपस में बांटने पर था।
यहां तक कि कई बार वह सिख रेजीमेंट के सैन्य अफसरों व सैनिकों को भारत के खिलाफ लड़ाई के लिए भी उकसाते। वह उन्हें खालिस्तान मूवमेंट में शामिल होने को कहते। हालांकि किसी भी भारतीय युद्धबंदी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
युद्धोन्माद भड़का रहा मीडिया
पूर्व एयर मार्शल केसी नंदा करिअप्पा ने युद्धोन्माद भड़काने के लिए मीडिया को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया कई बार गैरजिम्मेदार ढंग से खबरें चलाता है। कई बार अधूरे व गलत तथ्यों पर खबरें चलाई जा रही हैं।