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Dehradun News: प्रभारियों के भरोसे चल रहा वन महकमा

Mon, 15 Dec 2025 01:41 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 15 Dec 2025 01:41 AM IST
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Forest department is running on the trust of in-charges
एक अधिकारी पर कई प्रभार, महीनों से चल रही व्यवस्था
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रभारियों के भरोसे वन विभाग चल रहा है। वन विभाग के मुखिया से लेकर डीएफओ तक के अधिकारियों के पास कई प्रभार हैं। इसके अलावा वन विभाग के अफसरों के पास वन निगम की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में कामकाज पर प्रभावित होने की आशंका है।

प्रमुख वन संरक्षक के बाद पीसीसीएफ वन्यजीव सबसे अहम पद माना जाता है। वन्यजीवों को रेस्क्यू करने, पिंजरा लगाने से लेकर मारने की अनुमति देने की जिम्मेदारी केवल एक पीसीसीएफ वन्यजीव ही दे सकते हैं। इसके साथ ही टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी पीसीसीएफ वन्यजीव को रिपोर्ट करते हैं। पीसीसीएफ वन्यजीव और प्रमुख वन संरक्षक हॉफ का पद एक ही अधिकारी के पास है। तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक के 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद दोनों चार्ज एक ही अधिकारी के पास है। मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल के पास वन निगम के महाप्रबंधक गढ़वाल का भी जिम्मा है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं के पास मुख्य वन संरक्षक कार्ययोजना, निदेशक फारेस्ट ट्रेनिंग अकादमी के अलावा वन निगम के जीएम कुमाऊं का भी कार्यभार है। सबसे संवेदनशील और राजस्व की दृृष्टि से सबसे अहम पश्चिम वृत्त माना जाता है, जिसके अधीन रामनगर, तराई पश्चिम, तराई केंद्रीय, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय और हल्द्वानी वन प्रभाग आता है पर पश्चिम वृत्त वन संरक्षक के पद पर करीब तीन महीने से पूर्णकालिक अधिकारी तैनात नहीं है। यहां पर तैनात वनसंरक्षक को वन मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था, इसके बाद कार्बेट टाइगर रिजर्व निदेशक को पश्चिम वृत्त वन सक्षिक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। तब से यही व्यवस्था चल रही है। अपर सचिव वन के पास वन संरक्षक यमुना वृत्त के कामकाज को भी देखने की जिम्मेदारी है। चंपावत वन प्रभाग के डीएफओ के सेवानिवृत्त होने के बाद डीएफओ पिथौरागढ़ को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यहां भी अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। इसी तरह अन्य अधिकारियों के पास भी कई चार्ज हैं।
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विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया नहीं हो सकी पूरी
वन विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया करीब तीन साल से चल रही है। इसमें कई वन प्रभागों को समायोजित किया जाना है। केवल नैनीताल जिले में ही सात वन प्रभाग हैं। इसी तरह अन्य जगहों पर स्थिति है। अगर यह प्रभाग समायोजित होते हैं, तो जिले स्तर पर प्रबंधन का काम काम हो सकेगा साथ ही अधिकारियों के पद भी कम होंगे। पर पुनर्गठन का काम पूरा नहीं हो सका है।
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कोट
आईएफएस अधिकारियों के तबादले की एक विस्तृत प्रक्रिया होती है, जिसके कारण कुछ समय लग जाता है। जल्द ही अधिकारियों की तैनाती होगी। इसके अलावा विभागीय पुनर्गठन को लेकर भी प्रयास किए जा रहे हैं। -आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव वन
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