चीन ने यहां जीता भारतवासियों का दिल, आप भी जानिए क्या किया...
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कैलाश परिक्रमा कर लौटे 16वें दल के यात्री सुधीर कुमार वर्मा निवासी मल्लीताल नैनीताल भोलेनाथ की नगरी कैलाश के दर्शन से बेहद रोमांचित हैं। बादल और सूर्य की किरणों के सुनहरे आगोश में उन्हें कैलाश के भव्य दर्शन हुए। उनके साथ पत्नी सुनीता भी कैलाश दर्शन कर निहाल हैं। चीन में स्वास्थ्य खराब (सांस लेने में दिक्कत) होने के बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और इसका प्रसाद कैलाश के दर्शन के रूप में उन्हें मिला।
ज्वैलर कारोबारी सुधीर वर्मा ने बताया कि चीन नियोजित विकास के पथ पर अग्रसर है। उसने लिपुपास सीमा तक सड़क का विस्तार कर लिया है। सड़क काफी चौड़ी बनाई जा रही है। यात्रियों को लिपुपास से महज डेढ़ सौ मीटर तक ही पैदल चलना पड़ा। सड़क का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
चीनी समय के अनुसार श्रमिक सुबह आठ बजे से सड़क निर्माण कार्य में जुट जा रहे हैं। अगली बार यात्रियों को चीन में बिल्कुल भी पैदल नहीं चलना पड़ेगा। दल में शामिल सभी 57 यात्रियों, उनका सामान, बीजा आदि चेक कर वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें आईटीबीपी के सुपुर्द किया।
हमारे यहां हर चीज में राजनीति आड़े आ जाती है...
सुधीर ने बताया कि हमारे यहां तो हर चीज में राजनीति आड़े आ जाती है, जबकि चीन का नागरिक अपने देश के लिए सोचता है और उसी के अनुरूप कार्य करता है। चीन की तरह सख्त चेकिंग व्यवस्था हमारे देश में भी होनी चाहिए। विदेशों से यात्री कब आ रहे हैं, कब जा रहे हैं, इसका पूरा हिसाब रखा जाता है।
भारतीय सीमा पर नाभीढांग से ऊपर रोड कटान चल रहा है, लेकिन इसकी गति इतनी धीमी है कि अगले कई वर्षों में भी इसका पूरा हो पाना संभव नजर नहीं आता है। उन्होंने कहा कि यदि चीन जैसी फुर्ती से हमारे देश में भी कार्य हो तो कोई क्षेत्र पिछड़ा नजर नहीं आएगा।
केएमवीएन, आईटीबीपी का जताया आभार
कैलाश यात्रा से लौटे यात्रियों ने केएमवीएन और आईटीबीपी का आभार जताया। यात्री सुधीर वर्मा और उनकी पत्नी सुनीता वर्मा ने कहा कि केएमवीएन की व्यवस्थाओं से उन्हें नहीं लगा कि वह अपने घर से दूर हैं। कहा कि जितनी सुविधा मिल रही थी इतनी तो घर पर भी नहीं मिलती हैं।