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नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के साथ ही विशेष अभियान शुरू, पांच गाड़ियां सीज, 40 का चालान

Sat, 14 Sep 2019 02:15 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 02:15 AM IST
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Five vehicle seas, 60 challans for non-acceptance of new rules
वाहन चेकिंग करते आरटीओ विभाग के कर्मचारी और अधिकारी।
देहरादून। केंद्र सरकार की ओर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू करने और राज्य सरकार की ओर से कम्पाउडिंग पॉलिसी को पारित करने के साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार से नए सिरे से अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के पहले दिन पांच वाहन सीज कर 60 का चालान किया गया। इस दौरान चौथी कक्षा में पढ़ने वाले नौ साल के एक बालक को ई-रिक्शा चलाते पकड़ा। अधिकारियों ने ई-रिक्शा सीज कर बालक को अपने वाहन से घर पहुंचाया।
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एआरटीओ प्रशासन अरविंद पांडे ने बताया कि अभियान के पहले दिन देहरादून और मसूरी में अभियान चलाया गया। इस दौरान ट्रिपल राइडिंग, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कई ऐसी वाहनों को भी पकड़ा गया जो ओवरलोडेड थे। एआरटीओ ने बताया कि सीज और चालान किए गए वाहनों के कागजात अदालतों को भेजे जा रहे हैैं। सुनवाई के उपरांत नए मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक कोर्ट ही जुर्माने की राशि तय करेगा।
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40 से अधिक वाहनों की फिल्म उतारी
अभियान के दौरान 40 से अधिक वाहनों की फिल्में उतारी गई। कई वाहन मालिकों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन जांच कर रहे अधिकारियों ने नए मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला देकर किसी की नहीं सुनी और सबका चालान कर दिया।
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ट्रिपल राइडिंग करने वालों की ली क्लास
अभियान के पहले दिन ट्रिपल राइडिंग कर फर्राटा भर रहे युवाओं की जमकर क्लास ली गई। कई युवाओं के पास न ड्राइविंग लाइसेंस थे और न संबंधित वाहन के कागजात थे। अधिकारियों ने जब युवाओं की परिजनों से बात कराने की बात कही तो उन्होंने घर में पिटाई होने का हवाला देकर छोड़ने की अपील की। इस दौरान अधिकारियों ने कई परिजनों से बात कर दोबारा बच्चों को वाहन ने देने का अनुरोध किया।

प्रदूषण जांच, इंश्योरेंस की नहीं हुई जांच
अभियान के दौरान परिवहन अधिकारियों ने प्रदूषण जांच, इंश्योरेंस के कागजातोें की जांच नहीं की। एआरटीओ पांडे का कहना है कि जिन वाहन स्वामियों के पास ये दस्तावेज नहीं हैं वे इन समय रहते इन्हें दुरुस्त करवा लें। इसके लिए 30 सितंबर तक का समय दिया जा रहा है। उसके बाद राहत नहीं मिलने वाली।
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