उत्तराखंड: गढ़वाल और कुमाऊं के जंगलों में भड़की आग ने मचाई तबाही, 24 घंटे में 116 जगह लगी आग
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गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में लगी आग की घटनाओं ने तबाही मचा कर रख दी है। वन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो रविवार सुबह से सोमवार सुबह तक चौबीस घंटे के भीतर कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में कुल 116 जगहों में लगी आग ने भयंकर तबाही मचाई है। कुमाऊं क्षेत्र में 87 जगहों पर आग लगी है तो गढ़वाल में 17 जगहों में आग लगी है।
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो राज्य में अब तक आग की कुल 711 घटनाओं में आग को काबू पाने को लेकर चलाए गए अभियान के दौरान छह वनकर्मी भी झुलस चुके हैं, जबकि गढ़वाल क्षेत्र में आग से छह वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा अधिक भी हो सकता है। आग की बढ़ती घटनाओं ने फिलहाल विभाग के आला अफसरों की मुसीबत बढ़ा दी हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुमाऊं मंडल में अब तक जहां कुल 447 जगहों पर आग लगने की घटनाएं हुई हैं। गढ़वाल में यह आंकड़ा 226 तक पहुंच गया है। राज्य के वन्यजीव अभयारण्यों में आग लगने की 36 घटनाएं हो चुकी हैं। वन पंचायतों व सिविल सोयम क्षेत्रों में 153 जगहों पर आग लग चुकी है। इस तरह की घटनाओं का आंकड़ा 711 तक पहुंच गया है। वनाग्नि से अब तक 992.465 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। वहीं 984 बड़े पेड़ आग की भेंट चढ़ चुके हैं। इस आग से अब तक लगभग 16,56,628 रुपये का नुकसान होना बताया जा रहा है।
जंगलों को आग से बचाने को 1437 क्रू स्टेशन, 174 वाच टावरों से निगरानी
दूसरी ओर जंगलोें को आग से बचाने के लिए वन निदेशालय में अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया गया है। जंगलों में लगी आग पर तत्काल काबू पाया जा सके इसके लिए पूरे राज्य में 1437 क्रू स्टेशन की व्यवस्था की गई है। सभी क्रू स्टेशन में सात कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा राज्य में 174 वॉच टावर स्थापित किए गए हैं। जंगलों में लगी आग की तत्काल जानकारी दी जा सके इसके लिए प्रभागीय मास्टर कंट्रोल रूम, रेंज कार्यालयों, क्रू स्टेशन और फील्ड स्टाफ को वायरलेस मुहैया कराए गए हैं। आग की घटनाओं की जानकारी आनलाइन मुहैया कराने की भी व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से एसएमएस द्वारा फायर अलर्ट प्राप्त करने की सुविधा शुरू की गई है। जंगलों में आग न लगे या लगने की स्थिति में तत्काल इस पर काबू पाया जा सके। इसके लिए सभी 40 प्रभागीय वनाधिकारियों के मुख्यालयों में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों में आग की ज्यादा घटनाएं हुई, उनको देखते हुए संवेदनशील व अति संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। जिन पर विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों की पैनी नजर है।
बारिश से मिली राहत
पिछले चौबीस घंटे के भीतर राज्य के विभिन्न इलाकों में हुई बारिश व बूंदाबांदी से थोड़ी राहत भी मिली है लेकिन यदि आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ी तो वनाग्नि से और अधिक तबाही होगी।
किस साल कितनी घटनाएं, कितना नुकसान
| साल | घटनाएं | हेक्टेयर जंगल को नुकसान |
| 2010 | 789 | 1610.82 |
| 2011 | 150 | 231.75 |
| 2012 | 1328 | 2823.09 |
| 2013 | 245 | 384.05 |
| 2014 | 515 | 930.33 |
| 2015 | 412 | 701.61 |
| 2016 | 2074 | 4437.75 |
| 2017 | 805 | 1244.64 |
| 2018 | 2151 | 4480.04 |