फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   financial problem in Municipality

उत्तराखंड के नगर निकायों की वित्तीय हालत खस्ता

Thu, 26 May 2016 01:46 PM IST
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 May 2016 01:46 PM IST
विज्ञापन
financial problem in Municipality

राज्य के 92 नगर निकायों पर कर्मचारियों की 136 करोड़ की देनदारी ने सरकार और शासन के होश उड़ा दिए हैं। आला अफसरों को यह नहीं सूझ रहा कि आखिर नगर निकायों को इस गंभीर वित्तीय संकट से कैसे उभारा जाए।

विज्ञापन


वहीं कई सेवानिवृत्त अधिकारियों, कर्मचारियों के अदालत में चले जाने और अदालत द्वारा की गई टिप्पणी ‘क्यों न इन नगर निकायों को समाप्त कर दिया जाए’, सरकार व शासन के आला अफसरों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। सरकार इस संकट से निपटने के लिए अब नए शासनादेश की तैयारी में है।
विज्ञापन


शहरी विकास विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो राज्य भर में 92 नगर निकाय हैं। इन नगर निकायों में देहरादून, रुड़की, हरिद्वार और नैनीताल जैसे नगर निकायो की वित्तीय स्थिति तो ठीक है, लेकिन ज्यादातर नगर निकायों की स्थिति खस्ताहाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वित्तीय हालत कितनी खराब है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों, कर्मचारियों के पेंशन, ग्रेच्युटी समेत अन्य भुगतान को छोड़ भी दें तब भी सेवारत कर्मचारियों को मासिक वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक खराब वित्तीय स्थिति खटीमा, अल्मोड़ा, टनकपुर, भवाली और मसूरी जैसे नगर निकायों की है, जहां कर्मचारियों को कई महीने से वेतन नहीं मिल पाया है।

बजट नहीं तो नगर निकायों को समाप्त करें सरकार : हाईकोर्ट
जहां एक तरफ तमाम नगर निकाय वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं वहीं तमाम नगर निकायों के सेवानिवृत्त अफसरों और कर्मचारियों ने अदालत की शरण ली है। कर्मचारियों के अलग-अलग प्रकरणों की सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार और शहरी विकास विभाग को आड़े हाथों लिया है।

मुकदमों की सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की है, कि यदि नगर निकायों को ठीक ढंग से संचालित करने और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में सरकार अक्षम है तो क्यों न इन नगर निकायों को बंद कर दिया जाए। अदालत की इस टिप्पणी ने सरकार और शहरी विकास विभाग के अफसरों की नींद उड़ा दी है।

मसूरी की स्थिति भी ठीक नहीं
पहाड़ों की रानी कही जाने वाली मसूरी नगर निकाय की स्थिति बेहद खराब है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान स्थापित मसूरी में सालाना लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं, बावजूद मसूरी नगर निकाय वित्तीय तौर पर खुद को खड़ा नहीं कर पा रहा है। यह स्थिति तब है जब किसी जमाने में मसूरी नगर पालिका सबसे अमीर नगर निकायों में शुमार की जाती थी।


आखिर कैसे बढ़ी समस्या
सवाल उठता है कि आखिर नगर निकायों की माली हालत क्यों खराब हुई? दरअसल नगर निकायों को 13वें, 14वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग और राज्य सरकार की ओर से अवस्थापना विकास के लिए बजट दिया जाता है। लेकिन, नगर निकायों द्वारा अनाप शनाप तरीके से खर्च बढ़ा लिए जाने, कर्मचारियों की भर्तियां किए जाने से मामला गड़बड़ हो गया। अब नगर निकाय सरकार से वित्तीय मदद की उम्मीद लगा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed