किसान आंदोलन: रेल रोकने जा रहे अन्नदाताओं की पुलिस से धक्कामुक्की, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
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रुड़की में गन्ना भुगतान दिलाए जाने की मांग को लेकर रेल रोकने पहुंचे किसानों को पुलिस ने रेलवे स्टेशन के गेट पर ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई। इसके बाद किसानों ने वहीं पर धरना शुरू कर दिया। करीब ढाई घंटे के धरने के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने तीन सितंबर को चीनी की नीलामी के बाद भुगतान कराए जाने के आश्वासन दिया, इसपर किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।
उत्तराखंड किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने इकबालपुर शुगर मिल के गन्ना भुगतान को लेकर सोमवार को रुड़की में रेल रोकने की चेतावनी दे रखी थी। इसको लेकर पहले से ही पुलिस और प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए थे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को उत्तराखंड किसान मोर्चा के पदाधिकारियों के नेतृत्व में किसान रुड़की बोट क्लब पर पहुंचे। देखते ही देखते करीब चार सौ से अधिक किसान बोट क्लब पर एकत्र हो गए। इस दौरान पूर्व विधायक अंबरीष कुमार भी किसानों के बीच बोट क्लब पर पहुंच गए।
इसके बाद किसान रैली के रूप में रोडवेज बस स्टैंड, एसडीएम चौराहे, मिल्ट्री तिराहे व गंगनहर पुल से होते हुए रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर पहले से ही भारी मात्रा में पुलिसबल था। किसान नारेबाजी करते हुए रेलवे स्टेशन में जाने लगे। इसपर पुलिसकर्मियों ने किसानों को रेलवे स्टेशन में अंदर जाने से रोक दिया, लेकिन किसान अंदर जाने की जिद पर अड़े रहे। इस दौरान किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई, लेकिन पुलिसकर्मियों ने किसानों को अंदर नहीं जाने दिया। इसके बाद किसानों ने रेलवे स्टेशन के बाहर ही धरना शुरू कर दिया।
किसानों ने कहना कि जब तक पुलिस-प्रशासन उन्हें अंदर नहीं जाने देंगे वह वहीं धरने पर बैठे रहेंगे। इस दौरान भगवानपुर विधायक ममता राकेश भी किसानों के बीच पहुंच गई। उन्होंने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि वह हर तरह से किसानों के साथ हैं। किसानों के भुगतान तक वह धरना देंगी। करीब दो घंटे के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने किसानों के बीच पहुंचकर आश्वासन दिया कि तीन तारीख को निश्चित तौर पर चीनी की नीलामी करा दी जाएगी। इसके बाद किसानों का भुगतान करा दिया जाएगा। इसके बाद किसानों ने जेएम के आश्वासन पर तीन सितंबर तक के लिए आंदोलन टाल दिया।
कब क्या हुआ
12:00 बजे किसान बोट क्लब पर एकत्र हुए
02:00 बजे किसान बोट क्लब से रेलवे स्टेशन के लिए निकले
02:20 बजे किसान रेलवे स्टेशन पर पहुंचे
02:25 बजे किसान रेलवे स्टेशन पर किसानों और पुलिसकर्मियों में धक्कामुक्की
02:35 बजे किसान स्टेशन पर धरने पर बैठे
02:45 बजे विधायक ममता राकेश किसानों के बीच पहुंची
04:15 बजे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल किसानों के बीच पहुंची
5:30 बजे किसानों ने अधिकारियों के आश्वासन पर समाप्त किया धरना
ये लोग रहे मौजूद
भगवानपुर विधायक ममता राकेश, पूर्व विधायक अंबरीष कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड, जिलाध्यक्ष महकार सिंह, जिला पंचायत सदस्य अदनान नवाज, कटार सिंह, दुष्यंत कुमार, राज सिंह, पप्पू भाटिया, पवन त्यागी, सिकंदर त्यागी, सुखपाल मुखिया, मोहम्मद अब्बास, रविंद्र त्यागी, मोहम्मद आजम, आकिल, सुरेंद्र, धर्मवीर प्रधान, आदित्य, सोहनवीर, चादवीर, नरेश लोहान, भूपेश शर्मा, जय सिंह प्रधान, नरेंद्र सिंह, सतबीर प्रधान, कामिल प्रधान, इकबाल प्रधान, अरविंद, वीरेंद्र सैनी, ज्ञानचंद, आकिल सैनी, मोहम्मद जाकिर आदि मौजूद रहे।
प्रशासन के फूले रहे हाथ पांव
सोमवार को सुबह से ही पुलिस और प्रशासन के हाथ पांव फूले रहे। गंगनहर पुल सहित बोट क्लब आदि स्थानों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। वहीं बोट क्लब पर किसानों के पहुंचने की पल पल जानकारी ली जाती रही ताकि किसानों की भीड़ का आकलन कर सुरक्षा के इंतजाम किए जा सके। बताया जाता है कि शनिवार की देर रात और सुबह तक किसानों के साथ आंदोलन को स्थगित करने के लिए वार्ता होती रही, लेकिन किसान किसी भी ठोस कार्रवाई के बिना मानने को तैयार नहीं थे।
क्या है इकबालपुर शुगर मिल के भुगतान की स्थिति
सत्र 2017-18 का शुगर मिल पर करीब 73 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। वहीं सत्र 2018-19 का 109 करोड़ का भुगतान बकाया है। इसके चलते दो साल का करीब 182 करोड़ का भुगतान बकाया है। शुगर मिल के द्वारा गोदाम आदि सील होने के कारण लंबे समय से भुगतान नहीं किया जा रहा है।
चीनी की नीलामी के बाद भी रह जाएगा भुगतान
यदि भुगतान की स्थिति पर नजर डाले, तो दोनों साल का करीब 182 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं शुगर मिल में करीब 139 करोड़ की चीनी पड़ी है। यदि पूरी चीनी की भी नीलामी कर दी जाए तो भी किसानों का भुगतान पूरा नहीं होगा, लेकिन किसानों को 139 करोड़ के भुगतान से भी भारी राहत मिलेगी।
जेएम की ओर से आश्वासन मिला है कि चीनी की नीलामी को आगे पीछे नहीं किया जा सकता है। लिहाजा किसानों के साथ बैठक कर नीलामी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएंगा। ताकि तीन सितंबर को चीनी की नीलामी हो जाए। जिस आश्वासन पर फिलाल तीन सितंबर तक आंदोलन टाल दिया गया है। तीन सितंबर को नीलामी नहीं होती है। तो रेल और सड़कों दोनों रोकी जाएगी।
- गुलशन रोड, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उकिमो