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Dehradun News: राजमा की अच्छी उपज के लिए करें पोषण प्रबंधन
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I-भीमावाला और ढकरानी में बड़े पैमानी पर होती है राजमा की खेतीपत्तों पर पीलापन या फिर धब्बे दिखाई देने पर करें छिड़कावI
विकासखंड के भीमावाला और ढकरानी गांव के किसान बड़े पैमाने पर राजमा की खेती करते हैं। फसल की बुआई को एक से डेढ़ माह हो चुके हैं। अब पैदावार बढ़ाने के लिए उसका उचित प्रबंधन जरूरी है। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पोषण प्रबंधन और खेत को खरपतवार मुक्त रखने की सलाह ही है। उनका कहना है कि पत्तों पर पीलापन या फिर धब्बे दिखाई देने पर छिड़काव जरूरी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. संजय कुमार राठी ने बताया कि अच्छे उत्पादन के लिए फसल की वृद्धि की अवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस समय किसान फसल की अच्छी तरह से देखभाल कर अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। खेत में नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस समय फसल की निगरानी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि पत्तियों में अधिक पीलापन अथवा पत्तियों के ऊपर भूरे गहरे काले धब्बे कवक जनित बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
Iऐसे करें उपचारI
डॉ. संजय कुमार राठी ने बताया कि पत्तियों में हल्का पीलापन दिखाई देने पर दो प्रतिशत यूरिया के साथ एनपीके 0-0-50 अथवा एनपीके19-19-19 की एक किग्रा एवं 250 मिली. सागरिका द्रव्य मात्रा प्रति एकड़ क्षेत्रफल में छिड़काव करना चाहिए। यदि फसल में नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग अच्छी मात्रा में किया गया है और गोबर की खाद भी डाली गई है, तो फसल में एनपीके-05234 का छिड़काव करना चाहिए। इससे पौधों में फलियां अधिक वजनदार बनती हैं। पत्तियों के ऊपर धब्बेदार रोग निवारण के लिए प्रति एकड़ क्षेत्रफल में 200 ग्राम कार्बेंडाजिम एवं 500 ग्राम मैंगो का मिश्रण 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए। इसके स्थान पर 200 मिलीलीटर प्रोपीकोनाजॉल अथवा टेबलेकॉनाजोल का छिड़काव भी किया जा सकता है।
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विकासखंड के भीमावाला और ढकरानी गांव के किसान बड़े पैमाने पर राजमा की खेती करते हैं। फसल की बुआई को एक से डेढ़ माह हो चुके हैं। अब पैदावार बढ़ाने के लिए उसका उचित प्रबंधन जरूरी है। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पोषण प्रबंधन और खेत को खरपतवार मुक्त रखने की सलाह ही है। उनका कहना है कि पत्तों पर पीलापन या फिर धब्बे दिखाई देने पर छिड़काव जरूरी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. संजय कुमार राठी ने बताया कि अच्छे उत्पादन के लिए फसल की वृद्धि की अवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस समय किसान फसल की अच्छी तरह से देखभाल कर अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। खेत में नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस समय फसल की निगरानी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि पत्तियों में अधिक पीलापन अथवा पत्तियों के ऊपर भूरे गहरे काले धब्बे कवक जनित बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
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Iऐसे करें उपचारI
डॉ. संजय कुमार राठी ने बताया कि पत्तियों में हल्का पीलापन दिखाई देने पर दो प्रतिशत यूरिया के साथ एनपीके 0-0-50 अथवा एनपीके19-19-19 की एक किग्रा एवं 250 मिली. सागरिका द्रव्य मात्रा प्रति एकड़ क्षेत्रफल में छिड़काव करना चाहिए। यदि फसल में नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग अच्छी मात्रा में किया गया है और गोबर की खाद भी डाली गई है, तो फसल में एनपीके-05234 का छिड़काव करना चाहिए। इससे पौधों में फलियां अधिक वजनदार बनती हैं। पत्तियों के ऊपर धब्बेदार रोग निवारण के लिए प्रति एकड़ क्षेत्रफल में 200 ग्राम कार्बेंडाजिम एवं 500 ग्राम मैंगो का मिश्रण 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए। इसके स्थान पर 200 मिलीलीटर प्रोपीकोनाजॉल अथवा टेबलेकॉनाजोल का छिड़काव भी किया जा सकता है।
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