कर्ज में डूबे एक और किसान ने की खुदकुशी
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बैंकों और साहूकार का कर्ज नहीं चुका पाने से परेशान एक और किसान ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि बैंक का नोटिस मिलने के बाद से वह मानसिक तौर पर परेशान चल रहा था।
उधर मृतक के परिजनों ने एसबीआई के फील्ड अफसर पर किसान को खुदकुशी के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
विकासखंड के पचपेड़ा हल्दी निवासी काश्तकार राम अवतार (45) पुत्र राम प्रसाद ने शनिवार रात करीब साढ़े दस बजे घर से 300 मीटर दूर यूकेलिप्टिस के पेड़ पर लटककर गमछे से फांसी लगाकर जान दे दी। इस दौरान मृतक का भाई अनंतराम वहां से गुजरा तो उसने परिजनों को बुलाया।
परिजन उसे उतारकर निजी अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने किसान को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची सत्रहमील पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया।
मृतक के भाई ने एसबीआई बैंक लगाया आरोप
मृतक के भाई पूर्व प्रधान अनंत राम ने बताया कि राम अवतार ने स्टेट बैंक खटीमा से एक लाख अस्सी हजार रुपये का लोन लिया था जो बढ़कर एक लाख 97 हजार 633 रुपये हो गया। बीओबी नानकमत्ता से एक लाख 23 हजार लिए थे।
इसकी अदायगी नहीं होने पर दोनों बैंकों से नोटिस आ रहे हैं। एसबीआई के फील्ड आफिसर ने तीन दिन पहले घर पर आकर राम अवतार से तीन दिन में रुपये जमा करने को कहा था। कर्ज नहीं लौटाने पर जमीन की नीलामी की बात कही थी। राम अवतार ने आठ दिन का समय मांगा था, लेकिन उसे समय नहीं दिया गया। कुछ कर्ज उसने साहूकारों से भी ले रखा था।
पुलिस क्षेत्राधिकारी मेहरा ने कहा कि काश्तकार की आत्महत्या के मामले में प्रारंभिक जांच में दो बातें सामने आई हैं। इसमें कर्ज नहीं चुकाने पर बैंक का नोटिस और दूसरा कारण पारिवारिक भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
परिवार का एक मात्र सहारा था राम अवतार
मृतक राम अवतार अपने परिवार का एक मात्र सहारा था। उसकी सात पुत्रियां, एक पुत्र है। एक पुत्री छाया का विवाह अमरिया अढौली में हुआ है, जबकि छह बेटियां व एक पुत्र अभी पढ़ाई कर रहे हैं। पूरे परिवार की जिम्मेदारी अब मृतक की पत्नी शकुंतला देवी पर है। उनके पास ढाई एकड़ जमीन है।
अनंत राम ने बताया तीन साल से राम अवतार समेत आसपास के किसान खेती में नुकसान उठा रहे हैं। फसल में बीमारी लग रही है। उसकी रोकथाम के लिए महंगे कीटनाशकों के इस्तेमाल से फसल की लागत के अनुरूप दाम नहीं मिलने से बैंकों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा बैंक काश्तकारों से ऋण वसूली के समय बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं।
उधर, स्टेट बैंक के प्रबंधक युधिष्ठिर गौतम ने फोन पर हुई वार्ता में कहा कि वह इस समय अवकाश पर बाहर गए हैं। मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
मंगलवार को आने के बाद ही काश्तकार के ऋण के विषय में सही जानकारी दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि जो भी नोटिस काश्तकारों को दिए गए हैं, वह रुटीन प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ये नोटिस काश्तकारों को ऋण में राहत देने और खाते को नियमित कराने के लिए दिए जाते हैं। इस समय एनपीए खातों में ब्याज माफ करने की योजना चल रही है।