नहीं रहे पोस्टर कविता से पहाड़ के दर्द को बयां करने वाले प्रसिद्ध चित्रकार बी मोहन नेगी
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उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध चित्रकार बी मोहन नेगी नहीं रहे। कविता पोस्टर के चितेरे पुरोधा साहित्यकार बी. मोहन नेगी के आकस्मिक निधन पर साहित्य, संस्कृति सहित सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने दुख प्रकट कर पहाड़ के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है।
अपने 57 साल के चित्रकला जीवन में बृजमोहन सिंह नेगी ने हजारों कविता पोस्टर, पेटिंग, रेखांकन और कोलाज बनाए। उनके विषय पहाड़ की संवेदना और उसकी पीड़ा को सजीव रूप से बयां करते थे। बी.मोहन नेगी चुक्खूवाला स्थित अपने पैतृक आवास में रहकर पिछले एक माह से अपना इलाज करवा रहे थे।
गत 27 सितम्बर को उनके छोटे बेटे का पौड़ी में विवाह हुआ। जिसके बाद रूटीन चेकअप के लिए दून आ गए। उन्हें थायराइड की समस्या थी। बाद में निमोनिया हुआ और बिगड़ गया। स्व. नेगी ने लोक संस्कृति और लोक कविताओं को पोस्टर के माध्यम से एक नई पहचान दी थी।
उत्तराखंड में शोक की लहर
पलायन, बेरोजगारी, आपदा, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित हिमवंत कवि स्व. चंद्रकुंवर बत्र्वाल और पत्रकार स्व. उमेश डोभाल पर उन्होंने कई कविता पोस्टर बनाए, जो आज भी पाठकों के दिलों में हैं।
उनके निधन पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी, कैलाश खंडूरी, अनसूया प्रसाद मलासी, श्याम लाल सुंदरियाल, कलश संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल, रुद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चौधरी, केदारनाथ विधाक मनोज रावत सहित लोक कवि मुरली दीवान, सुधीर बत्र्वाल, जगदंबा चमोला आदि ने गहरा दुख प्रकट किया है। इधर, रुद्रप्रयाग प्रेस क्लब ने भी साहित्यकार बी. मोहन नेगी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
1984 में पहली बार अपनी कविता पोस्टर को राष्ट्रीय मंच दिया
नेगी ने वर्ष 1984 में पहली बार अपनी कविता, पोस्टर व चित्रकला को राष्ट्रीय मंच दिया। इस दौर में उन्होंने दिल्ली, लखनऊ, मुम्बई में प्रदर्शनी लगाकर उत्तराखंड की चित्रकला की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित। प्रदेश के हर आयोजन में उनके कविता पोस्टर लोगों के मन में जगह बना लेते।
यही वजह रही कि उन्हें हिमगिरी सम्मान, लक्ष्मी प्रसाद नौटियाल, प्रकाश पुरोहित जयदीप, चंद्र कुंवर बर्त्वाल, देवभूमि, गढ़ विभूति, हिलांस जैसे सम्मान से विभूषित किया गया। गोपेश्वर, गौचर व फिर पौड़ी में डाकघर की सेवा में रहते हुए भी बी. मोहन नेगी ने चित्रकला की सेवा जारी रखी।
बेहद हंसमुख व मिलनसार व्यकित्व के धनी बी. मोहन नेगी चित्रकला के अलावा डाक टिकटों व देश-विदेश के नोटों के कलेक्शन का भी शौक रखते थे। डाक टिकटों पर भी उनके कविता पोस्टर ज्वलंत है। इसके अलावा पौड़ी शहर की समस्याओं पर भी कोलाज तैयार करना और उसे अधिकारियों तक पहुंचाना उनकी आदत थी। पेयजल, सड़क, स्कूल उनके केंद्र में रहे।