केदारनाथ त्रासदी के चार साल बाद भी नहीं रुकी तलाश, मां के लिए पहुंचा बेटा
उत्तराखंड में 2013 में आई जल प्रलय के घाव अब भी हरे हैं। आपदा में लापता हुए लोगों के परिजनों की अपने प्रियजनों के लौट आने की उम्मीद अभी टूटी नहीं है।
इस साल की चारधाम यात्रा में मध्य प्रदेश का चार सदस्यीय दल आपदा में गुम हुए अपने घर के सदस्यों, रिश्तेदारों की तलाश में उत्तराखंड पहुंचा है। वह यात्रा मार्गों पर उनकी तलाश करेंगे, लोगों को खोये परिजनों के फोटो दिखाकर उनके बारे में जानकारी लेंगे। इसके अलावा केदार बाबा के दरबार में लोगों की कुशलता और जल्द लौटने की अर्जी लगाएंगे।
मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी येंद्र राठौर उर्फ दिनेश अपनी बहन संगीता परमार, जीजा अजय परमार व रिश्तेदार पंकज गहलौत के साथ शुक्रवार को तीर्थनगरी पहुंचे हैं। येंद्र राठौर ने बताया कि वह या उनके रिश्तेदार आपदा के बाद से लापता लोगों की तलाश में तब से अब तक लगभग हर साल उत्तराखंड आते हैं।
उनके माता शांता देवी राठौर, मौसी पुष्पा गहलौत व मौसा बृजमोहन गहलौत समेत रिश्तेदारों का दस सदस्यीय दल वर्ष 2013 में यात्रा पर आया था, लेकिन इनमें से कोई सदस्य वापस नहीं लौटा।
उस दिन गौरीकुंड से केदारनाथ को निकल चुके थी मां
येंद्र ने बताया कि 15 जून-2013 को आखिरी बार मां शांता राठौर व मौसा बृजमोहन गहलौत से बहन की फोन पर बात हुई थी। उस वक्त दल के सदस्य गौरीकुंड से केदारनाथ की यात्रा पर रवाना हो रहे थे। इसके बाद से उनके परिजन लापता है। लापता परिजनों की तलाश में मध्य प्रदेश से 15 लोगों का दल उनकी खोजबीन में उत्तराखंड आया था, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला।
आपदा के दौरान लापता हुई राजस्थान की एक महिला के वर्ष 2015 में गंगोत्री रूट पर मिलने की जानकारी मिलने के बाद 2015 में येंद्र के छोटे भाई शैलेंद्र राठौर इस उम्मीद में खोये यात्री दल की तलाश में उत्तराखंड आए कि शायद उनके प्रियजन भी उन्हें मिल जाएं, लेकिन कोई नहीं मिला।
यह दल हुआ था लापता
जल प्रलय के बाद से मध्य प्रदेश के लापता दस सदस्यीय यात्री दल में शांता राठौर, पुष्पा गहलौत, बृजमोहन गहलौत, प्रभुलाल परमार, पुष्पा परमार, विद्यासागर दुबे, शकुंतला दुबे, जयुना प्रसाद राठौर, विद्या राठौर आदि शामिल थे।