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‘आढ़त बाजार : पहले तस्वीर साफ करे एमडीडीए, कितना देगी मुआवजा, नए प्लॉट के क्या होंगे रेट’
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Iअधिग्रहीत भूमि व नई आढ़त मंडी में दी जाने वाली जमीन के रेट तय नहीं होने से व्यापारियों में असमंजसI
आढ़त बाजार स्थानांतरण प्रकरण को सात माह गुजरने के बाद अब तक जमीनों के रेट तय नहीं होने से व्यापारी असमंजस में हैं। आढ़त बाजार एसोसिएशन का कहना है कि एमडीडीए ने न तो अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि का मुआवजा रेट बताया गया है और न ही हरिद्वार बाईपास पर नई आढ़त मंडी में दी जाने वाली जमीन का रेट।
गौरतलब हो कि पुराने आढ़त बाजार में जाम लगने के कारण हरिद्वार बाईपास रोड पर नई आढ़त मंडी बनाई जा रही है। नई आढ़त बाजार के लिए 7.7 हेक्टेयर भूमि सरकार मुफ्त दे रही है। नया आढ़त बाजार ब्राह्मणवाला व निरंजनपुर स्थित एमडीडीए की भूमि पर बनेगा। कैबिनेट के प्रस्ताव के मुताबिक आढ़त बाजार विस्थापन में व्यापारियों को प्लॉट के बदले कोई कीमत अदा नहीं करनी होगी। व्यापारियों की अधिग्रहित भूमि के बदले दोगुनी कीमत के प्लॉट उन्हें नई आढ़त बाजार में आवंटित किए जाएंगे। लेकिन, व्यापारियों में अब तक इसे लेकर असमंजस बना हुआ है।
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Iआखिर क्या चाहते हैं व्यापारीI
आढ़त बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र गोयल कहते हैं कि सबसे पहले तो एमडीडीए तस्वीर साफ करे। वह यह बताए कि उन लोगों की जमीन लेकर मुआवजा किस रेट पर दिया जाएगा। आढ़त बाजार में उन लोगों की दुकानें भी बनी हैं, उसका मूल्यांकन किस तरह से होगा। इसके बदले में उन्हें हरिद्वार बाईपास पर दी जाने वाली जमीन किस रेट पर दी जाएगी। वह कहते हैं कि नई आढ़त मंडी में सिर्फ दोगुनी कीमत की जमीन देने का फार्मूला उचित नहीं है। वह बताते हैं कि पुरानी आढ़त बाजार में जमीन का रेट 1,37,000 रुपए मीटर है, जबकि हरिद्वार बाईपास पर यह रेट 24,000 रुपये मीटर है। ऐसे में अगर एमडीडीए दोगुनी कीमत की भी जमीन देता है तो व्यापारियों को नुकसान है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी जमीनों का मूल्यांकन सरकारी रेट पर करते हुए मुआवजा दिया जाए,जबकि दी जाने वाली जमीन भी सर्किल रेट पर दी जाए।
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I‘मुफ्त जगह नाकाफी, दुकान भी तो बनानी है’I
व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ मुफ्त जमीन मिलने से उनका काम नहीं चलेगा। उन्हें नई आढ़त मंडी में निर्माण भी करना होगा। इसलिए उन लोगों ने एमडीडीए से मांग की है कि जमीन का वास्तविक मूल्यांकन करते हुए नई जमीन प्रदान की जाए ताकि वह लोग अतिरिक्त रकम दे दुकान का निर्माण कर सकें।-- -- -- -- -- -- -- -- -ऐसा होगा आढ़त बाजार
आढ़त बाजार के शिफ्ट होने से सहारनपुर चौक से तहसील चौक के बीच लगने वाले जाम की समस्या का स्थाई निदान हो जाएगा। यहां 16 से 18 मीटर सड़क को 24 मीटर कर दिया जाएगा। सरकार नई आढ़त बाजार के लिए 7.7493 हेक्टेयर भूमि मुफ्त में दे रही है। इस भूमि की कीमत सर्किल रेट के अनुसार 222.79 करोड़ रुपये है।
Iकागजों पर कम जगह, कब्जा अधिकI
एमडीडीए पुराने आढ़त बाजार में भूमि अधिग्रहण करने के लिए कारोबारियों को नोटिस भेज रहा है। एमडीडीए की ओर से भेजे गए नोटिसों के बाद व्यापारी अपनी जमीनों के कागज लेकर एमडीडीए पहुंच रहे हैं। पड़ताल में सामने आ रहा है कि करीब 40 फीसदी मामलों में रजिस्ट्री में जमीन कम और कब्जा अधिक पर निकल रहा है। इसे लेकर एमडीडीए के अफसर असमंजस में हैं। आढ़त एसोसिएशन का कहना है कि अगर ऐसा है तो उन्हें बताया जाए, वे लोग इन मामलों का हल निकालेंगे।
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Iआढ़त बाजार की जमीन लेकर उसका मुआवजा देने के लिए फार्मूूला तय किया गया है, इसमें जमीन के सर्किल रेट के साथ ही निर्माण को भी शामिल किया गया है, दोनों की वैल्यूएशन के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। अगर व्यापारियों को कोई समस्या है तो बैठक में इसका निस्तारण कर लिया जाएगा, व्यापारियों को कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। - एमएस बर्निया, सचिव, एमडीडीएI
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आढ़त बाजार स्थानांतरण प्रकरण को सात माह गुजरने के बाद अब तक जमीनों के रेट तय नहीं होने से व्यापारी असमंजस में हैं। आढ़त बाजार एसोसिएशन का कहना है कि एमडीडीए ने न तो अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि का मुआवजा रेट बताया गया है और न ही हरिद्वार बाईपास पर नई आढ़त मंडी में दी जाने वाली जमीन का रेट।
गौरतलब हो कि पुराने आढ़त बाजार में जाम लगने के कारण हरिद्वार बाईपास रोड पर नई आढ़त मंडी बनाई जा रही है। नई आढ़त बाजार के लिए 7.7 हेक्टेयर भूमि सरकार मुफ्त दे रही है। नया आढ़त बाजार ब्राह्मणवाला व निरंजनपुर स्थित एमडीडीए की भूमि पर बनेगा। कैबिनेट के प्रस्ताव के मुताबिक आढ़त बाजार विस्थापन में व्यापारियों को प्लॉट के बदले कोई कीमत अदा नहीं करनी होगी। व्यापारियों की अधिग्रहित भूमि के बदले दोगुनी कीमत के प्लॉट उन्हें नई आढ़त बाजार में आवंटित किए जाएंगे। लेकिन, व्यापारियों में अब तक इसे लेकर असमंजस बना हुआ है।
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Iआखिर क्या चाहते हैं व्यापारीI
आढ़त बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र गोयल कहते हैं कि सबसे पहले तो एमडीडीए तस्वीर साफ करे। वह यह बताए कि उन लोगों की जमीन लेकर मुआवजा किस रेट पर दिया जाएगा। आढ़त बाजार में उन लोगों की दुकानें भी बनी हैं, उसका मूल्यांकन किस तरह से होगा। इसके बदले में उन्हें हरिद्वार बाईपास पर दी जाने वाली जमीन किस रेट पर दी जाएगी। वह कहते हैं कि नई आढ़त मंडी में सिर्फ दोगुनी कीमत की जमीन देने का फार्मूला उचित नहीं है। वह बताते हैं कि पुरानी आढ़त बाजार में जमीन का रेट 1,37,000 रुपए मीटर है, जबकि हरिद्वार बाईपास पर यह रेट 24,000 रुपये मीटर है। ऐसे में अगर एमडीडीए दोगुनी कीमत की भी जमीन देता है तो व्यापारियों को नुकसान है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी जमीनों का मूल्यांकन सरकारी रेट पर करते हुए मुआवजा दिया जाए,जबकि दी जाने वाली जमीन भी सर्किल रेट पर दी जाए।
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I‘मुफ्त जगह नाकाफी, दुकान भी तो बनानी है’I
व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ मुफ्त जमीन मिलने से उनका काम नहीं चलेगा। उन्हें नई आढ़त मंडी में निर्माण भी करना होगा। इसलिए उन लोगों ने एमडीडीए से मांग की है कि जमीन का वास्तविक मूल्यांकन करते हुए नई जमीन प्रदान की जाए ताकि वह लोग अतिरिक्त रकम दे दुकान का निर्माण कर सकें।
आढ़त बाजार के शिफ्ट होने से सहारनपुर चौक से तहसील चौक के बीच लगने वाले जाम की समस्या का स्थाई निदान हो जाएगा। यहां 16 से 18 मीटर सड़क को 24 मीटर कर दिया जाएगा। सरकार नई आढ़त बाजार के लिए 7.7493 हेक्टेयर भूमि मुफ्त में दे रही है। इस भूमि की कीमत सर्किल रेट के अनुसार 222.79 करोड़ रुपये है।
Iकागजों पर कम जगह, कब्जा अधिकI
एमडीडीए पुराने आढ़त बाजार में भूमि अधिग्रहण करने के लिए कारोबारियों को नोटिस भेज रहा है। एमडीडीए की ओर से भेजे गए नोटिसों के बाद व्यापारी अपनी जमीनों के कागज लेकर एमडीडीए पहुंच रहे हैं। पड़ताल में सामने आ रहा है कि करीब 40 फीसदी मामलों में रजिस्ट्री में जमीन कम और कब्जा अधिक पर निकल रहा है। इसे लेकर एमडीडीए के अफसर असमंजस में हैं। आढ़त एसोसिएशन का कहना है कि अगर ऐसा है तो उन्हें बताया जाए, वे लोग इन मामलों का हल निकालेंगे।
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Iआढ़त बाजार की जमीन लेकर उसका मुआवजा देने के लिए फार्मूूला तय किया गया है, इसमें जमीन के सर्किल रेट के साथ ही निर्माण को भी शामिल किया गया है, दोनों की वैल्यूएशन के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। अगर व्यापारियों को कोई समस्या है तो बैठक में इसका निस्तारण कर लिया जाएगा, व्यापारियों को कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। - एमएस बर्निया, सचिव, एमडीडीएI