ये मांगे नहीं मानी तो जुलाई से 'ठप' हो जाएगा उत्तराखंड
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शनिवार को कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आखिरकार विरोध का रास्ता अख्तियार कर लिया है। पंचायत सभागार में हुई प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में आंदोलन का ऐलान कर दिया गया।
सोमवार को शासन के साथ होने वाली बैठक में सकारात्मक नतीजे न निकलने पर कर्मचारियों ने 30 जुलाई के बाद हड़ताल का फैसला किया है। इससे पहले धरना प्रदर्शन और गेट मीटिंग के जरिए विरोध जताया जाएगा।
बैठक में पदाधिकारियों का साफ कहना था कि बार-बार के आश्वासन के बाद भी मांगों पर स्थिति जस की तस है। प्रदेश प्रवक्ता अरुण पांडे के मुताबिक करीब-करीब हर जिले से विरोध सामने आया है। ऐसे में परिषद के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
11 मई को मुख्य सचिव एन रविशंकर के साथ कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में सकारात्मक नतीजा न निकला तो आंदोलन तय है।
ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें
दरअसल कर्मचारी वेतन विसंगतियों को दूर किए बिना सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने का विरोध कर रहे हैं। परिषद का कहना है कि इससे कर्मचारियों को वेतन में खासा नुकसान होगा। परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह के मुताबिक यह नुकसान हर कर्मचारी के लिए प्रति माह 15 हजार रुपये तक हो सकता है।
दूसरी ओर शासन मान रहा है कि सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के लागू होने पर वेतन विसंगतियों का मतलब नहीं रह जाएगा। कारण नए आयोग की ओर से वेतनमान का निर्धारण नए सिरे से होगा। ऐसे में शासन ने वेतन विसंगतियों पर चुप्पी साधे रखने की रणनीति अपनाई है।
मुख्य मांगें
-वर्ग तीन और वर्ग दो के कार्मिकों की वेतन विसंगति दूर हो
-विभागों का पुनर्गठन किया जाए
-वाहन भत्ता दिया जाए, वर्दीधारक कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर हो
-विभिन्न विभागों की सेवा नियमावली तैयार की जाए