गैरसैंण: हंगामे के बीच सरकार ने पारित कराए 11 विधेयक
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गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दूसरे दिन हंगामे के बीच सरकार ने अनुदान मांगों, अनुपूरक बजट सहित 11 विधेयक बिना चर्चा के ही ध्वनिमत से पारित करा लिए। पहले दिन स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच की मांग पर अड़ी भाजपा ने मंगलवार को गैरसैंण में स्थायी राजधानी के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर सीट से उठ खडे़ हुए। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने नियमों का हवाला देते हुए चर्चा का प्रस्ताव स्वीकार करने से इंकार किया। 11.10 बजे पर इस मांग को लेकर भाजपा विधायक वेल में आ गए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष चर्चा के लिए प्रश्नकाल को कुर्बान करने के लिए भी तैयार है। इस पर सदन 12.20 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 12.20 पर सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सदन ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे रानीखेत के पूर्व विधायक पूरण सिंह मेहरा और प्रदेश की विधानसभा के सदस्य रहे खड़ग सिंह वोहरा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भाजपा ने पेश की चार्जशीट, जड़े कई आरोप
इसके बाद 12.50 बजे जैसे ही सदन में संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने प्रक्रिया संबंधित निदेश सदन के पटल पर रखे, नेता प्रतिपक्ष ने राजधानी के मुद्दे पर चर्चा की मांग उठा दी। भाजपा के सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। पीठ की ओर विधेयकों की प्रतियां फाड़कर फेंकी गई। कई भाजपा विधायक वेल में ही धरने पर बैठ गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्थायी राजधानी की मांग के प्रस्ताव को ग्राह्यता पर सुनने का आश्वासन भी दिया पर विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने गैरसैंण चार्जशीट भी सदन में पेश की, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। हंगामे के बीच ही डेढ़ बजे तक सदन में कैग की लेखा परीक्षा और कैग की आपदा के बाद की स्थिति पर रिपोर्ट को भी सदन के पटल पर रखा गया।
सरकार ने 31 अनुदान मांगों सहित 7 विधेयक ध्वनिमत से पारित करा लिया। इसके साथ ही सदन की कार्यवाही को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया, हालांकि बाद में स्थगन की अवधि आधे घंटे और बढ़ाई गई। शाम को 3.30 बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही में चार और विधेयक पारित कराए गए।
विशेष दर्जा, ग्रीन और जल बोनस मांगा
सदन में हंगामे के बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य का विशेष दर्जा बरकरार रखने, ग्रीन और जल बोनस देने का संकल्प सदन में रखा। इस संकल्प को हंगामे के बीच ही पारित कर दिया गया।
सदन के पटल पर रखे गए प्रतिवेदन
-राज्य के वित्त पर 31 मार्च 2012 को समाप्त हुए वर्ष के लिये भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का प्रतिवेदन
-31 मार्च 2014 को समाप्त हुए वर्ष के लिए उतराखंड में प्राकृतिक आपदा, जून 2013 प्रतिक्रिया, राहत एवं तात्कालिक प्रकृति के क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं की पुनर्स्थापना की निष्पादन लेखा परीक्षा पर भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक का वर्ष 2015 का प्रतिवेदन
-उतराखंड पेयजल निगम के वर्ष 2010-11 से वर्ष 2013-14 तक के वार्षिक लेखा प्रतिवेदन।
-विशेषाधिकार समिति का प्रतिवेदन
ये विधेयक हुए पारित
1- भारतीय स्टांप उत्तराखंड संशोधन विधेयक 2015
2- उत्तराखंड विनियोग 2015-16 का प्रथम अनुपूरक विधेयक, 2015
3- उत्तराखंड राज्य विधानसभा सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन, संसोधन विधेयक 2015
4- उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिह्नित आंदोलनकारियों तथा उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण विधेयक 2015
5- उत्तराखंड औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक 2015
6- उत्तराखंड उपकर विधेयक 2015
7- उत्तराखंड माल के स्थानीय क्षेत्रों में प्रवेश पर कर संशोधन विधेयक 2015
8- उत्तराखंड चलचित्र विनियमन संशोधन विधेक 2015
9- उत्तराखंड आमोद और पणकर द्वितीय संशोधन विधेयक 2015
10- उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर संशोधन विधेयक 2015
11- उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा संशोधन विधेयक 2015