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मुख्यमंत्री नहीं दे सकते अफसरों को निर्देशः निर्वाचन आयोग

Mon, 27 Feb 2017 06:22 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 27 Feb 2017 06:22 PM IST
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election commission says cm can not give order to IAS officer
हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

सचिवालय जाकर अफसरों की बैठक लेना और उन्हें निर्देश देने में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की मुसीबत बढ़ती नजर आ रही है।

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भाजपा के बाद राज्य के एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया था। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने मामले का परीक्षण किया तो यह बात सामने आई कि मुख्यमंत्री आवश्यकता पड़ने पर केवल आपदा और कानून व्यवस्था के फेल होने पर ही बैठक लेकर अफसरों को निर्देशित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस बाबत आवश्यक दिशा निर्देश मांगे हैं।

15 फरवरी को चुनाव संपन्न होने के कुछ दिन बाद ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सचिवालय जाकर सरकारी कामकाज शुरू कर दिया था। भाजपा ने सैकड़ों फाइलें निपटाने का आरोप लगाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की थी। तब राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मुख्यमंत्री की कार्रवाई को सामान्य बताया था। इस पर मुख्य चुनाव आयोग (सीईसी) को भी शिकायत की गई।

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सोमवार को फिर से सचिवालय जा धमके हरीश रावत

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harish rawat - फोटो : amar ujala

इसी बीच मुख्यमंत्री बीते सोमवार को फिर से सचिवालय जा धमके तो भाजपा ने इस पर दोबारा आपत्ति जताई। तब सीएम ने सफाई दी कि उन्होंने केंद्र पोषित योजनाओं की प्रगति से संबंधित बैठक की थी। इसमें अफसरों को जल्द से जल्द योजनाओं का पैसा केंद्र से रिलीज करवाने के निर्देश दिए गए। वहीं मुख्य सचिव को भी पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिए।

इधर, राज्य के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रमेश चंद्र पाठक ने भी सीएम के इस प्रकार बैठकें लेने और अधिकारियों को निर्देश देने की बात को आचार संहिता के विपरीत बताया। मामला बढ़ता देख मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने शनिवार को ही इस संबंध में परीक्षण कराया।

पता चला कि जिस राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो, वहां आवश्यकता पड़ने पर राज्य का मुख्यमंत्री आपदा या फिर कानून-व्यवस्था के फेल होने की स्थिति में ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद होकर बैठक कर सकता है और आवश्यक निर्देश दे सकता है। मगर सामान्य कामकाज के लिए यह लागू नहीं है। ऐसे में उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण के प्रकाश में कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश मांगे है। राधा रतूड़ी ने बताया कि सीईसी की ओर से जैसे भी निर्देश दिए जाएंगे, वैसी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

20 फरवरी को जारी किए थे निर्देश

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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

मुख्यमंत्री ने बीती 20 फरवरी को मुख्य सचिव के अलावा सभी अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को लिखित निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अल्पावधि शेष है। लिहाजा, जिला योजना, राज्य योजना एवं केंद्र पोषित योजनाओं के अंतर्गत समस्य निर्माणाधीन कार्यों एवं परियोजनाओं की वित्तीय एवं भौतिक स्थिति की गहन समीक्षा करें।

इन सभी कार्यों को आपेक्षित गति प्रदान करें और निर्धारित समय में इन्हें पूरा कराया जाए। इसके अलावा यह भी कहा कि केंद्र पोषित योजनाओं से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि को भारत सरकार को उपलब्ध कराते हुए इन योजनाओं के लिए केंद्रांश की धनराशि प्राप्त किया जाना सुनिश्चित करें। 

भाजपा पर लगाए आरोप
मुख्यमंत्री ने रविवार को एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा पर तमाम आरोप मढ़े। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मेरा हेलीकाप्टर दिन में कई बार चेक होता रहा, मगर केंद्रीय मंत्रियों के हेलीकाप्टर की जांच किसी ने नहीं की। इसके अलावा उन्होंने गनर की वापसी पर भी चुटकी ली। कहा कि मेरे और मेरे मंत्रियों के गनर वापस लिए गए, जबकि तमाम नेताओं को अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा बरकरार रखी गई।

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