{"_id":"246d0b3fb1c964334130f083866d49b6","slug":"education-department-teacher-adjustment-wrong-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा विभाग में गलत समायोजन से शिक्षक परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा विभाग में गलत समायोजन से शिक्षक परेशान
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 30 Jun 2015 03:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में शिक्षकों के समायोजन से विभाग में हड़कंप मचा है। जिन स्कूलों में शिक्षक सरप्लस नहीं थे उन स्कूलों से भी आनन-फानन कुछ शिक्षकों का दूसरे जनपदों के स्कूलों में समायोजन कर दिया है।
विज्ञापन
शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने ऐसे ही एक मामले में शिक्षा महानिदेशक को यथावत स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं ब्लॉक में जगह खाली होने के बावजूद कुछ शिक्षकों को दूसरे जनपदों में भेजने के मामले में सामने आए हैं। राजकीय इंटर कॉलेज बुल्लावाला में पिछले कुछ वर्षों में छात्र संख्या बढ़ी है।
विज्ञापन
खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला की रिपोर्ट के मुताबिक छात्र संख्या के आधार पर स्कूल में कोई भी सरप्लस शिक्षक नहीं है, बीईओ की इस रिपोर्ट के बावजूद शिक्षा विभाग की ओर चार शिक्षकों को सरप्लस बताते हुए अपर निदेशक कार्यालय पौड़ी ने उनका हरिद्वार और उत्तरकाशी के स्कूलों में समायोजन कर दिया।
विज्ञापन
जीआईसी बुल्लावाला डोईवाला के सहायक अध्यापक गणित अजय राजपूत को बुल्लावाला से जीआईसी मातली उत्तरकाशी, सहायक अध्यापक सामान्य राजेंद्र रावत को राउमावि भोवापुर हरिद्वार, सहायक अध्यापक अंग्रेजी मनोहर पोखरियाल को जीआईसी होरोवाला दून एवं सहायक अध्यापक भाषा अनीता गुसांई को राउमावि अनेकी बहादराबाद समायोजित किया गया है।
स्कूल में शिक्षक सरप्लस न होने के बावजूद चार शिक्षकों को समायोजित किए जाने पर शिक्षकों में नाराजगी है। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2012 के सर्वे के आधार पर यह कार्रवाई की गई है, यदि फिर से सर्वे किया जाए तो कुछ स्कूलों को छोड़कर अन्य में शिक्षकों के और पद सरप्लस होंगे।
2012 के सर्वे के आधार पर हुए थे 2600 पद समाप्त
प्रदेश के स्कूलों में छात्र संख्या घटने पर विभाग की ओर से शिक्षकों के 2600 पद समाप्त किए गए थे। वर्ष 2012 के सर्वे के अनुसार शिक्षकों के यह पद समाप्त किए गए थे, इसके बावजूद 1400 शिक्षक बगैर पदों के स्कूल में कार्यरत थे, लेकिन वर्ष 2012 से अब तक कुछ स्कूलों में छात्र संख्या में इजाफा हुआ है।
यही वजह है कि वर्तमान में इन स्कूलों में शिक्षक का कोई भी पद सरप्लस नहीं है। वर्षों पूर्व किए गए सर्वे के आधार पर शिक्षकों के समायोजन से इस तरह की स्थिति समाने आयी है।
इस तरह के मामले भी आ रहे सामने
जीआईसी लामाचौड़ हल्द्वानी, नैनीताल में एक शिक्षक को ब्लॉक में पद खाली होने के बावजूद उसका नैनीताल ऊधमसिंह नगर में समायोजन किया गया है। शिक्षक का ए से बी श्रेणी में समायोजन किया गया है।
वहीं एक अन्य मामले में जीजीआईसी उत्तरकाशी की सहायक अध्यापिका के असंगत विषय की न होने के बावजूद उनका समायोजन किया गया है। इस तरह के मामले भी सामने आ रहे हैं जिसमें वर्ष 2013 में जिन शिक्षकों का सुगम से दुर्गम में तबादला हुआ। उनका अब सुगम में समायोजन कर दिया गया है।
समायोजन नियमों के तहत हुआ है। इन मामलों की जांच कराई जाएगी। नियमों के विरुद्ध कोई समायोजन हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डी सेंथिल पांडियन, शिक्षा महानिदेशक
जिन शिक्षकों का वर्ष 2013 में सुगम से दुर्गम में तबादला किया गया उनका विभाग ने सुगम स्कूलों में समायोजन कर दिया। तबादलों के लिए होने वाली काउंसिलिंग और स्कूलों के वर्गीकरण में शिक्षक प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया।
- प्रीतम सिंह बर्त्वाल, जिला मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ टिहरी
समायोजन में शासनादेश की अनदेखी कर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। जीओ के अनुरूप शिक्षकों का समायोजन किया जाए।
- सोहन माजिला, संरक्षक राजकीय शिक्षक संघ