इको सेंसिटिव जोन पर कैबिनेट की ना
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राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तरकाशी में संवेदी क्षेत्र (इको सेंसिटिव जोन) के निर्णय को वापस करवाए जाने का प्रस्ताव मंजूर हुआ। इस संबंध में प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल जल्द प्रधानमंत्री और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री से मिलेगा। इस मुद्दे पर आमराय बनाने के लिए राज्य में सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी।
12 दिसंबर 2012 को गोमुख से उत्तरकाशी तक संवेदी क्षेत्र बनाने की अधिसूचना केंद्र की ओर से जारी की गई थी। संवेदी क्षेत्र की घोषणा के बाद से ही इसका विरोध भी हो रहा है। कहा जा रहा है कि इससे विकास ठप पड़ जाएगा। संवेदी क्षेत्र पर प्रस्ताव के अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी बैठक में लिए गए। तय किया गया है कि प्रदेश में गन्ना मूल्य की दर और भुगतान दोनों यूपी की तर्ज पर होंगे।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में चीनी मिलों को सहकारी बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने और किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें अपर मुख्य सचिव व गन्ना विकास सचिव सदस्य होंगे। चौथा राज्य वित्त आयोग गठित करने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। शीतकालीन चारधाम यात्रा के संचालन को मंजूरी मिल गई है।
मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय
: चौथे राज्य वित्त आयोग के गठन को मंजूरी
: उत्तराखंड में यूपी के बराबर मिलेगा गन्ना मूल्य
: उत्तरकाशी के इको सेंसिटिव जोन के फैसले को वापस लिए जाने का प्रस्ताव
: मेरा गांव मेरी सड़क योजना मंजूर
: मडुवा समेत सभी स्थानीय उत्पादों का समर्थन मूल्य घोषित करेगी सरकार
: मेरा धन मेरा गांव योजना शुरू
: दस वर्ष अविरल सेवा देने वाले शिक्षकों को मिलेगा चयन वेतनमान
: फूलों की खेती व बागवानी पर नहीं लगेगी बिजली की वाणिज्यिक दर
: संविदा पर तैनात आयुर्वेद व होम्योपैथ चिकित्सकों का मानदेय बढ़ेगा
: जनजाति सलाहाकार परिषद में होंगे दो उपाध्यक्ष, नियमावली संसोधित
: गौवंश संरक्षण अधिनियम 2007 में संशोधन को मंजूरी
: चारा प्रजाति की एक करोड़ पौध निशुल्क वितरित होंगी
: सीएम विवेकाधीन कोष से सरकारी कर्मियों को भी मिलेगी मदद
: शीतकालीन चारधाम यात्रा को मंजूरी
: उत्तराखंड विष नियमावली 2014 को कैबिनेट की मंजूरी
दो मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाएं पंचायतों को
अतिलघु (माइक्रो) और लघु (छोटी) जल विद्युत परियोजनाओं की नीति को भी मंजूरी दे दी गई है। दो मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाएं कुछ शर्तों के साथ स्थानीय ग्राम पंचायत को दी जाएंगी जबकि 25 मेगावाट तक की परियोजनाएं निजी हाथों में सौंपी जाएंगी।
सरकारी कर्मी भी मुख्यमंत्री कोष से पा सकेंगे लाभ
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष नियमावली में राज्य कैबिनेट ने संशोधन किया है। अब इस कोष का लाभ सरकारी कर्मियों को भी मिलेगा। हालांकि उनको इस कोष से कोई भी धनराशि कार्य विशेष के लिए प्रोत्साहन के रूप में मिलेगी।