फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   earthquake may come again due to indian plates activation.

सालों से सोई भूकंप पट्टियां जगी, फिर आ सकता है 'जलजला'

Tue, 27 Oct 2015 01:56 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 27 Oct 2015 01:56 PM IST
विज्ञापन
earthquake may come again due to indian plates activation.

भूगर्भ में यूरेशियन प्लेट के नीचे इंडियन प्लेट के धंसने की वजह से हजारों सालों से निष्क्रिय पड़ीं हिमालयी क्षेत्र की भूकंप पट्टियां सक्रिय हो गई हैं। इन पट्टियों से कभी भी भूकंपीय ऊर्जा बाहर आकर जमीन की सतह को हिला सकती है।

विज्ञापन


इंडियन प्लेट धंसने की यह क्रिया है 2400 किमी के ‘आर्क’ में चल रही है। इस रेंज में तकरीबन एक हजार भूकंप पट्टियों का अंदाजा है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान  इन भूकंप पट्टियों की मैपिंग कर रहा है। इसके बाद जांच करके इन पट्टियों की सटीक उम्र पता की जाएगी।
विज्ञापन


वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों के अलावा हिमालयी क्षेत्र में काम कर रहे अमेरिका, स्विटजरलैंड के विज्ञानी भी भूकंप पट्टियों के सक्रिय होने की पुष्टि कर चुके हैं। भूगर्भ विज्ञानी हिमालय क्षेत्र में अब तक सात सौ भूकंप पट्टियों की निशानदेही कर चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वाडिया के विज्ञानियों ने उत्तराखंड में अब तक 98 भूकंप पट्टियों की मैपिंग कर ली है। इन पट्टियों को चिन्हित करने के बाद इन पर नजर रखी जा रही है। इन पट्टियों से कभी भी भूगर्भ के अंदर मंडरा रही इनर्जी बाहर आ सकती है। विज्ञानियों का आकलन है कि पट्टियां 10 हजार साल से पांच लाख साल पहले निष्क्रिय हो गई थीं।

इंडियन प्लेट के धंसने से बदल रहा भूगर्भ का सिस्टम

earthquake may come again due to indian plates activation.

इंडियन-यूरेशियन प्लेट की टकराहट के बाद इनमें सक्रियता आई है। विज्ञानियों का कहना है कि भूकंप पट्टियां भूगर्भ की दो प्लेटों के मिलने के स्थान को कहते हैं। जब इन दो प्लेटों के जोड़ के नीचे बड़ी प्लेट आ जाती है तो इससे भूगर्भ इनर्जी नहीं निकल पाती।

इंडियन प्लेट के धंसने से भूगर्भ का सिस्टम बदल रहा है जिससे जोड़ों के नीचे की प्लेटें एक से दूसरे स्थान पर खिसक रही हैं। इससे भूकंप पट्टियां सक्रिय हुई हैं।

24 अप्रैल को नेपाल, 24 अक्टूबर को पिथौरागढ़ और 26 अक्टूबर को हिंदूकुश के भूकंप को विज्ञानी इसी से जोड़ कर देख रहे हैं। स्विटजरलैंड के आइगर एम. विला, अमेरिका के डेविड बी राउले आदि ने भी भूकंप पट्टियों के सक्रिय होने की पुष्टि की है।

भूकंप पट्टियों हजारों-लाखों साल पुरानी हैं। इन्हें बदला नहीं जा सकता है। एहतियात बरता जा सकता है कि भूकंप पट्टियों के नजदीक आवासीय और विकास विकसित न की जाएं। यहां कभी भी भूगर्भ इनर्जी बाहर आ सकती है जिससे भूकंप के झटके लगेंगे और नुकसान हो सकता है। इन पट्टियों का चिन्हित करना और जानकारी रखना जरूरी है।
- डॉ. एके गुप्ता, निदेशक वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed