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पुष्पा की दान की गई संपत्ति पर नहीं रहेगा दून अस्पताल का हक
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दून निवासी 79 वर्षीय पुष्पा मुंजियाल ने अपनी संपत्ति का मालिकाना हक कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी के नाम क्या किया राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल प्रबंधन सकते में आ गया। दरअसल, पुष्पा मुंजियाल के इस कदम से उनकी दून अस्पताल को दान की गई रकम पर अब अस्पताल प्रबंधन का हक नहीं रहेगा।
खुड़बुड़ा स्थित गुरु नानक इंटर कालेज में शिक्षक रहीं पुष्पा ने सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2011 में 25 लाख रुपये की रकम दून अस्पताल को दान दी थी। यह रकम एफडी के रूप में अस्पताल को दी गई। दानकर्ता की शर्त है कि अस्पताल मूल रकम खर्च नहीं करेगा। इससे मिलने वाला सालाना ब्याज मरीजों की सुविधाओं में खर्च किया जाएगा। जरूरत के मुताबिक अस्पताल प्रशासन चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्ताव रखता था। समिति की मंजूरी के बाद यह रकम अस्पताल की छोटी-छोटी जरूरत पर खर्च की जाती थी। अस्पताल के मेडिकल कालेज बन जाने के बाद प्रबंधन समिति भंग हो गई। ऐसे में अस्पताल इस रकम को खर्च नहीं कर पाया और पैसा बैंक में पड़ा है। इस बीच दानकर्ता ने यह रकम जिला अस्पताल को हस्तांतरित करने की इच्छा जता दी। लगभग एक साल बाद मेडिकल कालेज में यूजर चार्ज को लेकर समिति बनी। तब कहीं ब्याज की रकम खर्च होने लगी। अभी इस रकम पर करीब 53 हजार रुपये छमाही ब्याज आता है। इस बीच पुष्पा ने अपनी संपत्ति राहुल गांधी के नाम कर दी, जिसमें यह एफडी भी शामिल है। पुष्पा का आरोप है कि उनके केयरटेकर को अस्पताल खर्च तक की जानकारी नहीं दे रहा था, जिस उद्देश्य से रकम दी गई, वह पूरा नहीं हुआ। वहीं, राजकीय दून मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि प्रबंधन समिति भंग होने और नई समिति गठिन होने में लगभग एक साल लगा। इतने ही वक्त रकम खर्च नहीं हुई। बाकि वक्त पैसा अस्पताल की छोटी-छोटी जरूरत पर खर्च किया जाता रहा है।
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खुड़बुड़ा स्थित गुरु नानक इंटर कालेज में शिक्षक रहीं पुष्पा ने सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2011 में 25 लाख रुपये की रकम दून अस्पताल को दान दी थी। यह रकम एफडी के रूप में अस्पताल को दी गई। दानकर्ता की शर्त है कि अस्पताल मूल रकम खर्च नहीं करेगा। इससे मिलने वाला सालाना ब्याज मरीजों की सुविधाओं में खर्च किया जाएगा। जरूरत के मुताबिक अस्पताल प्रशासन चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्ताव रखता था। समिति की मंजूरी के बाद यह रकम अस्पताल की छोटी-छोटी जरूरत पर खर्च की जाती थी। अस्पताल के मेडिकल कालेज बन जाने के बाद प्रबंधन समिति भंग हो गई। ऐसे में अस्पताल इस रकम को खर्च नहीं कर पाया और पैसा बैंक में पड़ा है। इस बीच दानकर्ता ने यह रकम जिला अस्पताल को हस्तांतरित करने की इच्छा जता दी। लगभग एक साल बाद मेडिकल कालेज में यूजर चार्ज को लेकर समिति बनी। तब कहीं ब्याज की रकम खर्च होने लगी। अभी इस रकम पर करीब 53 हजार रुपये छमाही ब्याज आता है। इस बीच पुष्पा ने अपनी संपत्ति राहुल गांधी के नाम कर दी, जिसमें यह एफडी भी शामिल है। पुष्पा का आरोप है कि उनके केयरटेकर को अस्पताल खर्च तक की जानकारी नहीं दे रहा था, जिस उद्देश्य से रकम दी गई, वह पूरा नहीं हुआ। वहीं, राजकीय दून मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि प्रबंधन समिति भंग होने और नई समिति गठिन होने में लगभग एक साल लगा। इतने ही वक्त रकम खर्च नहीं हुई। बाकि वक्त पैसा अस्पताल की छोटी-छोटी जरूरत पर खर्च किया जाता रहा है।
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