{"_id":"57663fd64f1c1b5a5611b629","slug":"doon-hospital-doctor-facing-problem-due-to-police","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस की बात मानना दून हॉस्पिटल के डॉक्टरों को पड़ा भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस की बात मानना दून हॉस्पिटल के डॉक्टरों को पड़ा भारी
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 19 Jun 2016 01:31 PM IST
विज्ञापन
दून अस्पताल
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दून अस्पताल के चिकित्सकीय पैनल को अपने ही अस्पताल के रेडियोलोजिस्ट से बात नहीं कर पुलिस कस्टडी में लिए गए बंदी से मारपीट की आरोपी पुलिस की बात मानना भारी पड़ गया। अदालत ने कहा कि पैनल के डॉक्टरों ने पुलिस से सांठगांठ कर कोर्ट में गलत रिपोर्ट पेश की है।
विज्ञापन
दून अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने बचाव में कोर्ट में जो जवाब दाखिल किए हैं उस पर अदालत ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि डॉक्टरों ने प्रेमनगर थाना पुलिस जिस पर अभियुक्त लियाकत के उत्पीड़न का आरोप है उसकी बात मानकर व्हाट्सएप पर एक्सरे देखकर रिपोर्ट तैयार कर दी, लेकिन इसी अस्पताल में मौजूद जहां वे कार्यरत है उसके रेडियोलोजिस्ट डॉ. एसके झा से बात नहीं की।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि चिकित्सकीय पैनल प्रेमनगर थाना पुलिस के प्रभाव में आकर उससे फोन पर बातचीत कर, पुलिस के कहे अनुसार सप्लीमेंट्री रिपोर्ट अभियुक्त की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति को छिपाते हुए तैयार करे। अदालत ने कहा कि जिस पुलिस पर न्यायालय के आदेशों का अनुपालन कराने का जिम्मा है, वही पुलिस न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए इस हद तक जाती है कि डाक्टरों से मिलकर झूठी और फर्जी रिपोर्ट तैयार करती है।
विज्ञापन
दून अस्पताल के तीनों डॉक्टर कोर्ट में पेश
पुलिस कस्टडी में बंदी की मेडिकल रिपोर्ट मामले में शनिवार को चिकित्सकीय पैनल के तीनों डाक्टर कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट में डॉक्टरों ने कहा कि मोबाइल फोन पर एक्सरे रिपोर्ट देखकर उन्होंने रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट बनाने में पैनल से गलती हुई है। इसके लिए वे न्यायालय के समाने भूल स्वीकार करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि भविष्य में दोबारा कभी इस तरह की गलती नहीं होगी। साथ ही कहा कि उनकी मंशा कोर्ट को गुमराह करने की नहीं थी।
कोर्ट में पेश हुए दून अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि उन्होंने बंदी के हाथों और शरीर एक्सरे, ईसीजी एवं संपूर्ण मेडिकल परीक्षण किया। ताकि मरीज के शरीर की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। मरीज के साथ न्याय हो सके इस उद्देश्य से उन्होंने उसे रेडियोलोजी डिपार्टमेंट के लिए रेफर किया। उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री रिपोर्ट का एकमात्र आधार रेडियोलॉजी की रिपोर्ट होती है। जो न्यायालय में पेश होती है। रेडियोलोजी की रिपोर्ट के आधार पर ही सप्लीमेंट्री रिपोर्ट तैयार होती है इसमें पैनल का खुद का कोई विवेक शामिल नहीं होता।
डॉक्टरों ने पुलिस पर लगाया आरोप
डॉक्टरों ने कहा कि उनकी ओर से गलत सप्लीमेंट्री रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई है, लेकिन यह भी कहा कि प्रेमनगर पुलिस की ओर से व्हाट्सएप पर रेडियोलोजी की गलत रिपोर्ट दिखाए जाने पर यह रिपोर्ट तैयार की।
पुलिस कस्टडी में मारपीट भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। डाक्टरों ने पुलिस के साथ मिलकर वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति को छिपाने का प्रयास करते हुए झूठी और गलत सप्लीमेंट्री रिपोर्ट तैयार की है।
- दीपक कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता
Published By : Nirmala Suyal