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पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता पर नहीं पड़ेगा ट्रंप की सत्ता का असर

Tue, 22 Nov 2016 03:14 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 22 Nov 2016 03:14 PM IST
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donald trump will not affect Paris deal
डोनल्ड ट्रंप - फोटो : Forbes

अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जीतने के बाद पेरिस समझौता निरस्त करने का चुनावी वादा किया था, लेकिन इसका प्रभाव मोरक्को की कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी)-22 में नहीं दिखा। यहां जुटे देशों ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के प्रति प्रतिबद्धता जताई और इसके क्रियान्वयन का संकल्प लिया।

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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) देहरादून ने यहां फारेस्ट एजेंडा प्रस्तुत किया। इस पर अगले साल बॉन, जर्मनी में होने वाली सीओपी-23 में निर्णय लिया जाएगा। जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का ब्लू प्रिंट तैयार करने के लिए मोरक्को में सात से 18 नवंबर तक विश्व के डेढ़ सौ अधिक देशों की पहली बैठक हुई थी। इसमें समझौते को लागू किए जाने के लिए फंड की व्यवस्था, ब्लू प्रिंट आदि पर चर्चा हुई।
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लेकिन यह आशंका बनी हुई थी कि ट्रंप के अमेरिका में चुनाव जीतने के बाद इस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कारण कि ट्रंप राष्ट्रपति बराक ओबामा के क्लीन पावर प्लान को निरस्त करके कोयला उद्योग को फिर से जीवित करने की घोषणा कर चुके थे। लेकिन कान्फ्रेंस में इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया।

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पेरिस समझौता वर्ष 2020 से लागू होना है

donald trump will not affect Paris deal
Paris deal - फोटो : twitter

मोरक्को में सभी देशों ने पेरिस समझौते का स्वागत करने के साथ इसे लागू करने के लिए संकल्प लिया। इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग से हुई क्षति का आकलन करने के लिए ‘फाइव ईयर वर्क प्लान’ को स्वीकृति दे दी। वर्क प्लान पर वर्ष 2017 से काम शुरू हो जाएगा।

इस कांफ्रेंस में आईसीएफआरई देहरादून ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए नया फारेस्ट एजेंडा प्रस्तुत किया। इस पर तय हुआ कि फिजी की अध्यक्षता में जर्मनी में होने वाली सीओपी-23 में इस पर विस्तार से विचार विमर्श किया जाएगा। पेरिस समझौता वर्ष 2020 से लागू होना है। इस बीच तीन साल में देश नियमावली तैयार करेंगे।

इसके पहले आईसीएफआरई ने रेड प्लस की अवधारणा दुनिया के देशों को दी है। इस बार मोरक्को में फारेस्ट एजेंडा दिया गया। इसको सीओपी-23 में रखा फिर रखा जाएगा। सीओपी-22 में पेरिस समझौता लागू करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करने पर बात हुई है। सभी देशों ने समझौते के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की।
- डॉ. वीआरएस रावत, सीनियर साइंटिस्ट, फारेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज डिवीजन, आईसीएफआरई

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