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14 वर्ष से एक स्थान पर डटे चिकित्सकों का तबादला
ब्यूरो / अमर उजाल, देहरादून
Updated Thu, 30 Jul 2015 12:06 PM IST
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पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के लिए सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। बिन डॉक्टरों के चल रहे पर्वतीय अस्पतालों में मैदानों से चिकित्सकों स्थानांतरित करने के बजाए उन्हें रोकने पर अधिक फोकस है।
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एक माह से चल रही चिकित्सकों की स्थानांतरण प्रक्रिया में बार बार हो रहे बदलाव मामला लटका हुआ है। पहले दस वर्ष से अधिक एक स्थान पर तैनात चिकित्सकों को तबादला सूची में लाने का निर्णय हुआ, जिसे बढ़ाकर 12 वर्ष किया गया।
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अब और स्वास्थ्य मंत्री के स्तर से 14 वर्ष से अधिक एक स्थान पर तैनात चिकित्सकों के ही ट्रांसफर करने के निर्देश शासन को मिले हैं। चिकित्सकों के तबादलों के लिए स्थानांतरण नीति प्रभावी होने के बावजूद उसके मापदंड बदले जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राज्य के सभी जनपदों में चिकित्सकों की तर्कसंगत तैनाती के निर्देशों के बावजूद विभाग पर्वतीय जनपदों में तैनाती नहीं बढ़ा रहा।
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वार्षिक तबादलों के तहत विभाग ने लगभग सवा सौ चिकित्सकों के स्थानांतरण का प्रस्ताव बनाया, लेकिन उसमें बार बार बदलाव हो रहा है। मैदानों में तैनात चिकित्सक पहाड़ में ट्रांसफर नहीं चाहते, जिसके चलते तय मापदंड बदल रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री के स्तर से ताजा निर्देशों के बाद फिर से सूची में बदलाव किया जा रहा है।
पहले विभाग ने जो सूची तैयार की थी उसमें दस वर्ष से अधिक एक स्थान पर तैनात चिकित्सकों को भेजा जा रहा था, जिसकी जद में मैदानों में तैनात अधिकांश चिकित्सक आ रहे थे। इसके बाद तैनाती को दो वर्ष बढ़ा 12 वर्ष किया, लेकिन उसमें भी सिफारिशी चिकित्सकों को खास राहत नहीं मिली।
अब 14 वर्ष से अधिक एक स्थान पर तैनात चिकित्सकों की सूची तैयार हो रही है, जिसके बाद पचास से साठ डाक्टर ही तबादला सूची में आएंगे। विभाग इसको लेकर गोपनियता बनाए हुए है लेकिन 31 जुलाई तक सूची जारी होने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी कि सरकार पहाड़ पर चिकित्सकों को भेजने लिए कितनी संजीदा है।