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जौलीग्रांट: डॉक्टर ने मरीज के शव से निकाली किडनी और आंख

Sun, 10 Jan 2016 04:35 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की Updated Sun, 10 Jan 2016 04:35 PM IST
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doctor removed kidney and eye from the patient dead body.

उत्तराखंड के रुड़की में युवती के शव से आंख और किडनी निकालने के मामले में जौलीग्रांट हॉस्पिटल के एक डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

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रुड़की निवासी युवती की बीते आठ दिसंबर को जौलीग्रांट हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। युवती आईसीयू में भर्ती थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के एक डॉक्टर ने शव से आंख और किडनी निकाल ली थी। एसएसपी हरिद्वार के निर्देश पर गंगनहर कोतवाली में जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला डोईवाला थाने भेज दिया गया है।
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पुलिस के मुताबिक शक्ति विहार कॉलोनी रुड़की निवासी सुधीर कुमार की बेटी काजल की दिसंबर में तबियत खराब हुई थी। शहर के डॉक्टरों ने उसे जौलीग्रांट रैफर कर दिया। पांच दिसंबर को काजल को जौलीग्रांट हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया। हालत बिगड़ने पर सात दिसंबर को उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। अगले दिन उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि काजल की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर कालरा ने उसकी आंख और किडनी निकाल ली। ऐसा करते उनकी छोटी बेटी ने देखा।
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डॉक्टरों ने डरा धमका कर शव किया सुपुर्द
आरोप यह भी है कि विरोध करने पर डॉक्टरों ने उन्हें डरा धमका कर शव सुपुर्द कर दिया। इसके बाद परिजनों ने रुड़की के एक श्मशान घाट पर शव को दफना दिया गया। इसके बाद से परिजन डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस व हॉस्पिटल के चक्कर काट रहे थे।

आखिर में परिजनों ने एसएसपी हरिद्वार सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस से गुहार लगाई। शनिवार को एसएसपी के निर्देश पर गंगनहर कोतवाली में काजल की माता शांति देवी की तरफ से जौलीग्रांट हॉस्पिटल के डॉक्टर कालरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल ने बताया कि चूंकि मामला डोईवाला थानाक्षेत्र का है, लिहाजा शून्य एफआईआर दर्ज कर केस डोईवाला पुलिस को भेज दिया गया है।

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शव के पोस्टमार्टम से आ सकता है सच सामने

doctor removed kidney and eye from the patient dead body.

सनसनीखेज मामले का सच शव के पोस्टमार्ट से सामने आ सकता है। परिजनों के मुताबिक बेटी के अविवाहित होने के कारण उन्होंने शव का दाह संस्कार करने के बजाय शमशान में उसे दफनाया था। ऐसे में यदि कब्र से निकालकर शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है तो आंख व किडनी निकालने का सच मेडिकल रिपोर्ट में आसानी से सामने आ सकता है।

परिजनों ने शव दफनाया, कागज जलाए
काजल की मां शांति देवी और पिता सुधीर कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने घटना के दौरान हॉस्पिटल में विरोध का प्रयास भी किया था। लेकिन उन्हें इस कदर डरा धमकाया गया कि डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद ही खत्म हो गई।

यही वजह है कि उन्होंने मेडिकल के सारे कागज भी आग के हवाले कर दिए। जिससे दर्दनाक घटना की याद न आए। बाद में कुछ जागरूक लोगों को आपबीती बताने पर उन्होंने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की ठानी और तब से अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते रहे। आखिरकार महीने भर बाद मुकदमा दर्ज हुआ।

परिजनों को शव बिना किसी अंग विच्छेदन के सौंपा जाता है। हर परिजन से इस आशय का पत्र लिया जाता है। इस मामले में भी परिजनों ने शव लेते समय अंग विच्छेदन नहीं होने की पुष्टि की है। इस संबंध में अस्पताल की ओर से पहले ही जवाब दिया जा चुका है।
- डॉ. जेपी शर्मा, एमएस, जौलीग्रांट अस्पताल

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