उत्तराखंड: गैरसैंण में सत्र को लेकर छिड़ी बयानी जंग में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह का ‘तड़का’
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गैरसैंण में विधानसभा सत्र कराए जाने को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट के आए विरोधाभासी बयानों के बीच कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने भी बयान का ‘तड़का’ लगा दिया। उन्होंने कहा,‘ वे भी नहीं चाहते कि गैरसैंण में शीतकालीन विधानसभा सत्र हो। ऐसे सत्र का क्या संदेश देना है, जहां पक्ष और विपक्ष जान बूझकर लड़ाई करते हों ताकि माहौल खराब हो और सत्र समाप्त हो जाए।’ सियासी हलकों में हरक सिंह के मीडिया में दिए गए इस बयान को प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। इधर, हरक, भट्ट के समर्थन में दिखे हैं तो उधर, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने यह कहकर मुख्यमंत्री के उस बयान का समर्थन किया कि सत्र देहरादून में हो या गैरसैंण में ये सरकार को तय करना है। सरकार कहेगी वे कहीं भी सत्र चलाने को तैयार हैं।
गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा सत्र को लेकर यह विवाद प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के उस बयान से शुरू हुआ। जिसमें उन्होंने कहा था कि संपूर्ण अवस्थापना जुटाए जाने के बाद ही गैरसैंण में सत्र कराया जाना चाहिए। उनके आए बयान पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जब यह प्रतिक्रिया दी कि सत्र कहां कराना है ये सरकार का काम है तो सियासी हलकों में इसे अजय भट्ट के बयान की काट के तौर पर देखा गया। सीएम के इस बयान पर भट्ट की भी उसी सधे अंदाज में प्रतिक्रिया आई, ‘सरकार को यह भी ध्यान में रखना है कि सरकार भाजपा की है। पार्टी को भी जवाब देना होता है।’ भट्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे अपने पूर्व में दिए गए बयान पर कायम है। सियासी हलकों में दोनों दिग्गजों के परस्पर विरोधी बयानों के अभी मायने टटोले जा रहे थे कि मंगलवार को कैबिनेट डॉ. हरक सिंह रावत और विधानसभा अध्यक्ष के बयानों ने बयानी जंग को और हवा दे दी। सरकार और भाजपा के भीतर छिड़ी बयानी जंग का तमाशा देख रही कांग्रेस अब विवाद में कूद पड़ी है। उसने भाजपा और सरकार पर गैरसैंण विरोधी होने का आरोप जड़ दिया है।
सत्र कराने के बिल्कुल पक्ष में नहीं
मैं बिल्कुल पक्ष में नहीं हूं। मुझसे हरक सिंह रावत के रूप में पूछे तो इस समय जाड़ों में वहां सत्र कराने का कोई औचित्य नहीं है। मैं जानता हूं वहां क्या स्थिति होती है। मैं हरीश रावत के समय देख चुका हूं। मैं अपनी सरकार में देख चुका हूं और विजय बहुगुणा के समय भी देख चुका हूं। लोग सब भागने को रहते हैं। ऐसा क्या संदेश देना है, पक्ष भी और विपक्ष जानबूझकर सत्र के दौरान लड़ाई करते हैं। जिससे माहौल खराब हो जाए और सत्र समाप्त हो जाए।
- हरक सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री (भट्ट के बयान पर मीडिया को दी प्रतिक्रिया)
सरकार जहां चाहे हम सत्र कराने को तैयार
सरकार जहां भी चाहे तो हम सत्र कराने को तैयार हैं। पिछली बार छह, सात व आठ दिसंबर को विपरीत परिस्थितियों में सत्र करा सकते हैं आज तो हम उससे बहुत आगे बढ़ें हैं। सब कुछ सरकार पर निर्भर करता है। सरकार कहेगी कि हमें गैरसैंण में सत्र चलाना है तो हम चलाएंगे। गैरसैंण आंदोलनकारियों का सपना है। उसमें कोई दिक्कत नहीं है। विधानमंडल भवन बन कर तैयार हो गया है। अजय भट्ट जी ने किस संदर्भ में कहा, मैं टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, लेकिन सरकार चाहेगी तो सत्र कराने को तैयार हैं।
- प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष (मीडिया में दी गई प्रतिक्रिया)
भाजपा बेनकाब, नहीं चाहती गैरसैंण राजधानी बने
भाजपा गैरसैंण मामले में बेनकाब हो गई है। अजय भट्ट भाजपा के अध्यक्ष हैं। उनका कोई राजनैतिक बयान मात्र उनका नहीं बल्कि पूरी पार्टी का आधिकारिक बयान हैं, जो भाजपा का स्टैंड है। भट्ट के बयान से साफ हो गया है कि भाजपा गैरसैंण को राजधानी बनाने के पक्ष में नहीं है। पक्ष में होती तो राज्य गठन के समय ही राजधानी का बिल लाती। वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही गैरसैंण को प्रमुखता मिली। तंबू में सत्र चलाया, विधानमंडल भवन और सचिवालय बनाया। लेकिन भाजपा ने पिछले डेढ़ साल में एक ईंट तक नहीं रखी।
- सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस