इस पार्टी के धड़े अनेक, लेकिन झंडा एक
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क्षेत्रीय दल की चुनाव आयोग से मान्यता खो चुके उत्तराखंड क्रांति दल के धड़ों में असली, नकली होने की प्रतिस्पर्धा के आड़े सबसे बड़ी दिक्कत पार्टी चुनाव चिन्ह की है।
एक सी चुनाव सामग्री लेकर प्रचार
पुराना चुनाव चिन्ह कुर्सी गंवाने से सभी धड़े एक ही तरह की चुनाव सामग्री लेकर प्रचार में उतरे हैं। बिना चुनाव चिन्ह उक्रांद सभी धड़े एक सी चुनाव सामग्री लेकर प्रचार कर रहे हैं।
ऐसे में जब तक धड़ों को सिंबल आवंटित नहीं होते, यह पता लगाना भी मुश्किल है कि किस धड़े का प्रत्याशी कौन है। उत्तराखंड क्रांति दल का चुनाव चिन्ह कुर्सी पार्टी में आपसी फूट के चलते गिरते मत फीसदी के चलते केंद्रीय चुनाव आयोग ने पहले ही समाप्त कर दिया।
कुर्सी चुनाव चिन्ह को लेकर त्रिवेंद्र सिंह पंवार और दिवाकर भट्ट खेमे का चुनाव आयोग में वाद भी चला। आयोग ने त्रिवेंद्र पंवार धड़े को असली उक्रांद माना लेकिन चुनाव चिन्ह कप प्लेट हो गया।
क्षेत्रीय दल की मान्यता खत्म
2012 विधानसभा चुनाव में पार्टी कप प्लेट पर चुनाव में उतरी जबकि दिवाकर धड़ा भाजपा चुनाव चिन्ह पर उतरी। विधानसभा चुनाव में उक्रांद का मत दो फीसदी रहा जिससे स्थायी चुनाव चिन्ह और क्षेत्रीय दल की मान्यता खत्म हो गई।
अब लोकसभा चुनावों में दल चार धड़ों में बंटा हुआ है, किसी के पास कोई चुनाव चिन्ह नहीं है। ऐसे में सभी धड़े अपनी चुनाव सामग्री तक तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
धड़ों ने प्रत्याशी तो उतारने शुरू कर दिए हैं, लेकिन वह अपने क्षेत्र में जाकर प्रचार सामग्री के तौर पर उक्रांद का पार्टी निशान इस्तेमाल कर रहे हैं।