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कांग्रेसियों से लड़ाई के दौरान दून मेयर से दूर हुए अपने
गौरव मिश्रा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 13 Feb 2016 02:33 PM IST
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उत्तराखंड की सरकारी योजनाओं और नगर निगम अधिकार क्षेत्र पर कांग्रेसी मंत्री-विधायकों और मेयर के बीच जंग में भाजपा नेताओं की खामोशी के हवाले से अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या मेयर विनोद चमोली अकेले पड़ गए हैं?
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क्या इस वाक युद्ध में भाजपा नेताओं ने उनसे दूरी बना ली है? क्या भाजपा संगठन उनके साथ इस जंग में नहीं है? इन गर्माते सवालों पर अमर उजाला ने भाजपा नेताओं को टटोला तो जवाब सामने आया कि संगठन के नेता इंतजार कर रहे हैं कि मेयर मदद मांगें तो वे आगे आएं।
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पिछले कई दिनों से मेयर विनोद चमोली पर कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, विधायक राजकुमार ने ताबड़तोड़ जुबानी हमले किए हैं। इस सिलसिले में विधायक उमेश शर्मा काऊ भी शामिल हो गए हैं। कांग्रेस भी मेयर पर हमलावर हो गई है। मेयर के विरोध में कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना भी आगे आ गए हैं।
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उनका कहना है कि साफ-सफाई, नागरिक प्रशासन के मामले में नगर निगम विफल रहा है। इसके असली दोषी मेयर ही हैं। उनका कहना है कि मेयर से लोगों को बहुत उम्मीद थी लेकिन वे फ्लाप साबित हुए हैं। अब दूनवासी उनको मेयर चुनकर पछता रहे हैं। मेयर नगर में नजर ही नहीं आते।
हर क्षेत्र और वर्ग से ताल्लुक रखने वाला शख्स उनसे नाखुश है। महानगर कांग्रेस ने भी मेयर को गरिमापूर्ण व्यवहार करने की सलाह दी है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह चौहान का कहना है कि मेयर एक संवैधानिक पद है और इसकी बहुत गरिमा है। इसलिए मेयर जो कि नगर के प्रथम नागरिक हैं, गरिमापूर्ण आचरण करना चाहिए। वे बहुत अनुभवी हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष होने के साथ ही मेयर के तौर उनका दूसरा टर्म है। उनके अनुभव का फायदा नगर को मिलना चाहिए। इसके ठीक उलट, इस जुबानी जंग में किसी बड़े भाजपा नेता कि आवाज मेयर के पक्ष में अब तक बुलंद होती नजर नहीं आ रही है।
दरअसल, दबी जुबान में कुछ भाजपाई कह रहे हैं कि मुद्दे तो विकास और नगर निगम से संबंधित मसलों के दर्शाए जा रहे हैं, मगर हकीकत में साल 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को सामने रखकर अभी से गोटियां बिछाई जा रही हैं। नाम को अमृत योजना, नगर निकायों के अधिकार, हाउस टैक्स और मलिन बस्तियों के मुद्दे, कामर्शियल टैक्स पर भिड़ंत हो रही है।
मामला धर्मपुर और रायपुर सीट में वर्चस्व की लड़ाई का है। इससे पार्टी का क्या लेना-देना? वे इशारों में कहते हैं कि मेयर पार्टी कार्यक्रमों में शिरकत नहीं करते। सामाजिक समारोहों से भी दूर ही रहते हैं। बहुत कम लोगों के सुख-दुख में शरीक होते हैं। उनके हठधर्मितापूर्ण स्वभाव और व्यवहार से भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि नेता भी नाखुश हैं।
इस बाबत पूछने पर भाजपा महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल जरूर कहते हैं कि कांग्रेस नेताओं के साथ इस लड़ाई में मेयर अकेले नहीं हैं। अभी तक खामोशी के सवाल पर वे संगठन को मजबूत करने में व्यस्त होने की बात कहते हैं। वे कहते हैं कि पूरा संगठन मेयर के साथ खड़ा है।
मेयर जब भी सहयोग मांगेंगे, संगठन उनके पीछे खड़ा हो जाएगा। कांग्रेस के लोग यह न समझे कि मेयर अकेले पड़ गए हैं। मेयर के कट्टर समर्थकों में पार्षद सुशील गुप्ता, राकेश मंजखोला, भूपेंद्र कठैत, नंदिनी शर्मा, शारदा गुप्ता, सतीश कश्यप, बीना उनियाल से बात हुई तो वे कहते हैं कि हर भाजपाई पार्षद मेयर के साथ खड़ा है।
उनके इस राजनीतिक युद्ध में हम उनके साथ खड़े हैं। सोमवार से अपनी ताकत कांग्रेसियों को दिखाएंगे। मेयर विनोद चमोली का कहना है कि संगठन उनके साथ है। अभी प्रदेश और महानगर इकाई गठित हुई हैं, लिहाजा वे व्यस्त हैं, लेकिन पूरी भाजपा उनके साथ है।