आपदा में मृतकों के परिजनों को अब सरकार देगी पांच लाख मुआवजा
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भूस्खलन, बादल फटने या फिर अन्य किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा के दौरान मृत लोगों के परिजनों को अब प्रदेश सरकार पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। पहले यह राशि चार लाख रुपये थी। बढ़ी हुई एक लाख रुपये की सहायता पीड़ितों को फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में दी जाएगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त मकानों के निर्माण के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी एक लाख की बढ़ोतरी की गई है। पहले यह राशि दो लाख थी, जिसे अब तीन लाख किया गया है।
इसके अलावा आपदा के दौरान सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर करने के लिए ग्राम प्रहरियों को मोबाइल देने के साथ ही प्रतिमाह दो सौ रुपये चार्जिंग भत्ता देने का निर्णय लिया गया है। आपदा पीड़ित जो स्वयं के मकान क्षतिग्रस्त होने के कारण किराये के भवनों में रह रहे हैं, उनके मासिक किराये में भी बढ़ोतरी की जाएगी। हालांकि अभी बढ़ोतरी की दर तय नहीं की गई है।
क्षतिग्रस्त मकानों के लिए दो की जगह मिलेंगे तीन लाख
बीजापुर गेस्ट हाउस में हुई बैठक में आपदा के दौरान भवनों की क्षतिग्रस्तता की परिभाषा के संबंध में बने संशय तथा तकनीकी जटिलताओं पर विचार किया गया। निर्णय लिया गया कि भवन को क्षतिग्रस्त घोषित करने के संबंध में जेई की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय समिति द्वारा भवन का प्रमाणीकरण किया जाएगा।
यही समिति भवनों का धवस्तीकरण भी सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली तीन लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि उन सभी भवन स्वामियों को प्रदान की जाएगी, जिन्हें राज्य प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त घोषित किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि आपदा की स्थिति में ग्राम प्रहरियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मोबाइल, भत्ता देने के साथ ही ग्राम प्रहरियों को आपदा प्रबंधन केंद्रों से भी जोड़ा जाएगा। आपदा प्रबंधन के लिए ग्राम प्रहरियों के अलावा ग्राम स्तर पर कार्य करने वाले सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें पंचायत सचिव, राशन विक्रेता, जनप्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे।
आपदा राहत बजट के लिए आबकारी सेस पर चर्चा
सचिव, आपदा प्रबंधन शैलेश बगोली ने बताया कि आपदा राहत मद में सभी पर्वतीय जिलों को सात करोड़ और मैदानी जिलों को पांच करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह, प्रीतम सिंह पंवार, नवप्रभात, मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी, अपर सचिव सी. रविशंकर, उप सचिव आपदा प्रबंधन संतोष बडोनी समेत कई अफसर उपस्थित थे।
आपदा राहत कार्यों के बजट और पीड़ितों को वित्तीय सहायता मुहैया कराने के लिए सरकार अब आबकारी पर उपकर यानी सेस लगाने पर विचार कर रही है। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई। साथ ही खनन की रॉयल्टी से भी बजट की संभावनाएं तलाशने पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि यदि आबकारी, खनन पर कायदे से टैक्स लगा दिया जाए तो आपदा राहत कार्यों के लिए सरकार पर्याप्त बजट जुटा सकती है।