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आपदा पीड़ित ऐसे पा सकते हैं 'राहत'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 03 Sep 2013 09:11 AM IST
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प्रदेश में आपदा के दौरान लापता हुए लोगों के लिए डेथ सर्टिफिकेट जारी करने का रास्ता साफ हो गया।
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सोमवार को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के परामर्श के बाद डेथ सर्टिफिकेट जारी करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इसके बाद शासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया। अब लापता लोगों के परिजन को केंद्र से राहत राशि मिल सकेगी।
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राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार के सुनामी में लापता लोगों के लिए जारी मृत्यु प्रमाण पत्र की तर्ज पर आपदा में लापता पांच हजार से अधिक लोगों को मृत मानते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दे दिए हैं।
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न्याय विभाग और स्वास्थ्य मंत्री के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव पर केंद्र सरकार के रजिस्ट्रार जनरल से राय ली गई थी, जिनके निर्देश पर इसे जारी किया गया। गौरतलब है कि विभाग केवल उन्हीं लापता लोगों को मृत पंजीकृत करेगा, जिनका नाम लापता सूची में शामिल है।
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प्रमाण पत्र लेने के लिए लापता लोगों के परिजनों को कई दस्तावेज आवेदन के साथ संलग्न करने होंगे। जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के चीफ रजिस्ट्रार अन्य राज्यों के लापता लोगों को मृत पंजीकृत करने के लिए नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में एक सब रजिस्ट्रार तैनात करेंगे।
सब रजिस्ट्रार आपदा में अन्य राज्यों के लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए संबंधित स्थानीय आयुक्तों से दस्तावेज हासिल कर उनकी प्रमाणिकता जांचने के बाद सर्टिफिकेट जारी करेगा।
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गौरतलब है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत सामान्य हालात में किसी लापता व्यक्ति को सात साल बाद ही मृत मानकर डेथ सर्टिफिकेट जारी करने का ही प्रावधान है।
ऐसे में लापता लोगों के परिजनों को राहत राशि लेने और बीमा दावों समेत अन्य जरूरी कामों के लिए सात साल का इंतजार करना पड़ता। असाधारण परिस्थितियों में राज्य सरकार ने केंद्र के परामर्श पर तमिलनाडु की तरह यह व्यवस्था बनाई है।
क्या होगा मृत्यु प्रमाण पत्र से
- आश्रितों को घोषित राहत राशि मिल सकेगी
- इंश्योरेंस क्लेम लेने में भी मददगार होगा
- मृतक आश्रितों को सरकारी सेवाओं के लाभ मिलेंगे
- संपत्ति के म्यूटेशन में हो सकेगा इस्तेमाल
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