{"_id":"979d0f6ff0220db9b327edde8697024b","slug":"disaster-affected-parties","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा पीड़ित दलों को चाहिए ‘मुद्दा पैकेज’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा पीड़ित दलों को चाहिए ‘मुद्दा पैकेज’
रजा शास्त्री
Updated Thu, 08 Aug 2013 11:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपदा की मार से उत्तराखंड के राजनीतिक दल ठंडे पड़े हैं। जलप्रलय के पहले तक मिशन-2014 के लिए हुंकार भरने वाले नेताओं के पास अब मुद्दों का टोटा हो गया है। कुछ नहीं मिल रहा तो नेता आपस में ही पिले पड़े हैं। भाजपा, कांग्रेस और बसपा ने हाईकमान से मुद्दों का पैकेज मांगा है। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व हवा का रुख दे रहा है।
विज्ञापन
जिलाध्यक्ष को लेकर अंतर्कलह
उत्तराखंड कांग्रेस में जिलाध्यक्ष को लेकर अंतर्कलह है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और उनके पार्टी विरोधियों का गुट अपनी ढपली अपना राग बजा रहे हैं। कांग्रेस भवन में अलग-अलग खेमे लगाए नेता एक-दूसरे को गालियां बकते रहते हैं। मिशन-2014 के लिए कांग्रेस के अंदर कोई हरारत नहीं आई। आपदा पीड़ितों के लिए बनी कमेटी के नामित सदस्यों को लेकर घमासान थमा नहीं है।
विज्ञापन
वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीप वोहरा का कहना है कि हाईकमान से अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। महानगर भाजपा का बस्ता भी ठंडा है। बीच-बीच में टिहरी सांसद राज्य लक्ष्मी शाह किसी भाजपा मंडल में बैठक कर कार्यकर्ताओं से चुनाव में जुटने का आह्वान करके चली आती हैं। इसमें भाजपा नेता कुछ देर कांग्रेस को कोसते हैं, फिर चले जाते हैं।
विज्ञापन
बसपा के सारे कार्यक्रम स्थगित
महानगर अध्यक्ष नीलम सहगल का कहना है कि आपदा बड़ा मामला था। कुछ दिन गुजर जाएं फिर ढंग से काम किया जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में जड़ें जमाने में जुटी बसपा के सारे कार्यक्रम स्थगित हैं। बसपा प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर के दौरे थम गए हैं। तीनों दलों की हाई पावर कमेटियां देख रही हैं कि आपदा से उबरने के बाद उत्तराखंड में किस तरह का माहौल बनता है। उसी हिसाब से मुद्दे तय किए जाएंगे। इधर, उत्तराखंड क्रांति दल अभी अपने दफ्तर में काबिज होने के लिए संघर्ष कर रहा है।