कांग्रेसी सरकार ने उत्तराखंड में चुपचाप बढ़ाई महंगाई
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महंगाई की मार झेल रही उत्तराखंड की जनता पर राज्य की कांग्रेसी सरकार ने डांका डाल दिया है।
राजस्व के नुकसान से बचने के फेर में प्रदेश सरकार ने प्रदेश में डीजल भी प्रति लीटर 41 पैसे महंगा कर दिया है। पेट्रोल की तरह ही डीजल में भी अब वैट न्यूनतम नौ रुपए कर दिया गया है। पहले सरकार ने न्यूनतम वैट दस रुपए किया था, पर विरोध को देखते हुए उस समय फैसला वापस ले लिया गया था।
सचिव वित्त अमित सिंह नेगी की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रदेश में डीजल पर वैट 21 प्रतिशत या नौ रुपए प्रति लीटर जो भी अधिक हो रहेगा। 21 प्रतिशत के हिसाब से इस समय प्रदेश में डीजल पर करीब 8.59 रुपए प्रति लीटर वैट था।
यह नौ रुपए प्रति लीटर से कम है। लिहाजा डीजल की दर में कोई परिवर्तन न होते हुए भी अब प्रदेश में नौ रुपए प्रति लीटर की वैट दर प्रभावी होगी। इसके चलते रातों-रातों अब डीजल प्रदेश में 41 पैसा प्रति लीटर महंगा हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतें कम होने से पेट्रोल और डीजल के दाम कम
पेट्रोल और डीजल उत्तराखंड में राजस्व के सबसे बड़े स्रोत है। विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम हो रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को तो फायदा है पर प्रदेश को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
इस नुकसान से बचने के लिए ही यह तय कर दिया गया है कि डीजल पर कम से कम नौ रुपए प्रति लीटर का राजस्व वैट के रुप में सरकार को मिले ही मिले। यह कोशिश पहले भी की गई थी। उस समय न्यूनतम वैट दस रुपए रखा गया था।
भारी विरोध के चलते सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा था। डीजल पर ही सरकार ने 25 पैसा प्रति लीटर का सैस भी हाल ही में लगाया है। इससे डीजल पर वृद्धि करीब 66 पैसा प्रति लीटर हो गई है।
पहले पेट्रोल पर खेला गया यह खेल
इससे पहले पेट्रोल पर भी राजस्व से नुकसान से बचने के लिए यही खेल खेला गया था। सरकार ने पेट्रोल पर भी 25 प्रतिशत या 17 रुपए प्रति लीटर जो भी अधिक हो का आदेश जारी किया था। इससे पेट्रोल के दाम में पांच रुपये प्रति लीटर तक का फर्क आ गया था।
महंगाई को न्यौता
पेट्रोल के मुकाबले डीजल का महंगाई से सीधा नाता है। डीजल केदाम में थोड़ा सा इजाफा भी देर-सवेर खाद्य वस्तुओं से लेकर अन्य वस्तुओं पर भी सीधा पड़ता है। ऐसे में डीजल के दाम में इजाफा आने वाले समय में महंगाई को न्यौता देने वाला साबित होगा।