जल्द नई तेल आयात नीति लाएगी केंद्र सरकार: धर्मेंद्र प्रधान
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केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार नई तेल आयात नीति को लागू करने पर विचार कर रही है। नई तेल नीति को लेकर तैयार किए मसौदे को जल्द ही कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिरने के बाद जो बचत हुई है, उसमें 55 फीसदी बजट राज्यों के जरिए आम ग्राहकों को लौटाया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की परामर्शदाता समिति की बैठक में हिस्सा लेने के बाद मीडिया कर्मियों से रूबरू हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने यह जानकारी दी।
केंद्र व मंत्रालय की नीतियों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कारोबार में आए बदलाव के चलते नई तेल आयात नीति को लागू किया जाना जरूरी हो गया है। एक दशक पूर्व बनाई गई नीति में संशोधन कर नई आयात नीति तैयार कर जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में तेल उत्पादन को कैसे बढ़े, इसके लिए सरकार आधुनिकतम टेक्नोलॉजी प्रयोग करने पर विचार कर रही है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर साल पांच लाख महिलाओं की मौत घरेलू प्रदूषण के चलते हो रही है। देश में 60 फीसदी परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन मिल चुका है। बाकी बचे परिवारों को जल्द कनेक्शन देने के लिए ‘प्रधानमंत्री स्वच्छ ईंधन योजना’ की शुरुआत की गई है।
कीमतें घटने से हुई बचत का 55 फीसदी हिस्सा राज्यों को
आगामी तीन साल में ही देश के हर परिवार को एलपीजी कनेक्शन दे दिया जाएगा। गैस सब्सिडी के मुद्दे पर कहा कि पिछले एक साल में 28,000 करोड़ की सब्सिडी ग्राहकों के बैंक खाते में भेजी गई। मंत्रालय की ओर से विकसित किए गए तंत्र का ही नतीजा है कि देश भर में तीन करोड़ ऐसे ग्राहक चिह्नित किए गए जो सब्सिडी के हकदार ही नहीं थे।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद देश में 72 लाख ग्राहकों ने गैस सब्सिडी छोड़ी है। ऐसे ग्राहकों के इस कदम से देश में 50 लाख नए बीपीएल परिवारों को एलपीजी कनेक्शन से जोड़ा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के गिरने के बावजूद देश में पेट्रोलियम के दामों में कमी नहीं आने के सवाल पर कहा कि जुलाई 2014 के बाद 23 बार पेट्रोल और 17 बार डीजल के दामों में कमी की गई है।
तेल के दाम गिरने पर केंद्र को जो बचत हुई है उसमें 55 फीसदी बजट राज्यों को लौटाया गया है। बाकी 44 फीसदी बजट भी कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किए जा रहे हैं। कहा कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में जहां राज्यों का बजट 3.50 लाख करोड़ था वहीं 2015-16 में राज्यों का सालाना बजट 5.86 लाख करोड़ किया गया।