बड़े नोट बंद होने से बाजार में सन्नाटा, 60 प्रतिशत गिरी सेल
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प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद मंगलवार मध्य रात्रि से अचानक 500 और एक हजार के नोट बंद होने से बाजारों पर इसका बुरा असर देखने को मिला। हालात यह तक हो गई कि दिनभर की रुटीन सेल में 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ गई। सेंसेक्स गिरने से शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोग भी निराश नजर आए।
मंगलवार की देर शाम जैसे ही बुधवार से 500 और 1000 के नोट बंद करने की खबर फैली तो बाजारों पर इसका असर शुरू हो गया था। रात को कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। बुधवार को भी सुबह से ही नोट बंद होने का दुष्प्रभाव नजर आया। हालात यह रहे कि बैंकों में तालाबंदी के साथ ही दुकानें भी काफी लेट खुली।
आमतौर पर साढ़े नौ बजे से दस बजे तक खुलने वाला पलटन बाजार 11 बजे के बाद पूरी तरह खुला। बावजूद इसके पलटन बाजार में वह भीड़ नजर नहीं आई। केवल जरूरत के सामान खरीदने वाले लोग ही शॉपिंग को निकले। इसका असर सड़कों पर भी दिखा। आम दिनों के मुकाबले सड़कों पर कम ट्रैफिक दिखा।
फैसले से व्यापारियों में मचा हड़कंप
एक अनुमान के मुताबिक एक ही दिन में सेल में 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। व्यापारियों में इस फैसले के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। उधर, सुबह सेंसेक्स की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई।
दिनभर शेयर बाजार की गिरावट ने कारोबारियों के हौसले पस्त कर दिए। शेयर बाजार विशेषज्ञ रंजन वर्मा ने बताया कि बड़े नोट बंद होने का दुष्प्रभाव बाजार पर पड़ा। साथ ही अमेरिका में नए राष्ट्रपति के चयन की वजह से भी मार्केट में डाउनफॉल आया है। शेयर कारोबारियों को भी दिनभर में लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा मार
छोटी फल, सब्जी की दुकान या रेहड़ी वाले कारोबारियों पर नोट बंद होने के फैसले से ज्यादा प्रभाव पड़ा। उनके पास सुबह तो कुछ ग्राहक सब्जी व फल लेने आए, लेकिन दोपहर बाद तक उनके पास खुले पैसे नहीं बचे। 500 और एक हजार के नोट चल नहीं रहे थे, लिहाजा उनका कारोबार ठप हो गया।
सराफा बाजार रहा ठप
500 और 1000 के नोट बंद होने की वजह से राजधानी में सराफा बाजार पर भी बुरा असर पड़ा। ग्राहक सोना तो खरीदने आए, लेकिन 500 और 1000 रुपये के नोटों की वजह से सोना नहीं खरीद पाए। सराफा कारोबारियों ने बड़े नोट लेने से इंकार कर दिया। इस वजह से बुधवार को सराफा बाजार जल्द ही बंद हो गया।