जनसांख्यिकीय परिवर्तन: उत्तराखंड के कई जिलों में बदल रहा अनुपात, शासन ने तलब की खुफिया रिपोर्ट
जनसांख्यिकीय बदलावों पर रोक लगाने के प्रभावी उपाय करने की भी बात एक वर्ग करने लगा है। कई जिलों से शासन ने इस बाबत जिला प्रशासन और पुलिस से खुफिया रिपोर्ट भी तलब की है।
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देवभूमि उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा हाल में बड़ी तेजी से उछला है। उत्तराखंड के सीमाद्वार हरिद्वार से लेकर सुदूर सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ तक जनसांख्यिकीय अनुपात में भारी बदलाव देखने को मिला है। इससे कई किस्म के प्रश्न-प्रतिप्रश्न भी पैदा हुए हैं। सियासी हलकों मेें भी इसे लेकर खासी हलचल है। जनसांख्यिकीय बदलावों पर रोक लगाने के प्रभावी उपाय करने की भी बात एक वर्ग करने लगा है। कई जिलों से शासन ने इस बाबत जिला प्रशासन और पुलिस से खुफिया रिपोर्ट भी तलब की है।
हरिद्वार जिले में 37.39 फीसदी समुदाय विशेष की आबादी
धर्मनगरी हरिद्वार जिले में जनसांख्यिकीय संतुलन तेजी से बदल रहा है। हरिद्वार शहर विधानसभा को छोड़कर बाकी सभी विधानसभाओं में समुदाय विशेष की आबादी की दर बढ़ रही है। जिले की कुल आबादी में करीब 37.39 फीसदी समुदाय विशेष की हो गई है। आबादी के साथ धार्मिक शिक्षा संस्थान और इबादत स्थल बनने से हिंदू संगठनों की ओर से अक्सर विवाद भी होता है।
पुलिस-प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार्मिक विवादों को आपसी सहमति से निपटा देती है। अकेले हरिद्वार की बात की जाए तो ज्वालापुर मुसलिम आबादी का सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसके अलावा हरिद्वार के बहादराबाद, सराय, सीतापुर, फेरूपुर, सुल्तानपुर, पदार्था और रोशनाबाद में समुदाय विशेष आबादी बढ़ रही है। यूपी से सटा होने के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के परिवार हरिद्वार जिले में जमीनें खरीद रहे हैं।
शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिला पुलिस-प्रशासन ने बीते एक दशक में समुदाय विशेष की आबादी बढ़ने वाले इलाकों को चिह्नित करने की कवायद शुरू भी कर दी है। हिंदू आस्था के शहर में समुदाय विशेष की आबादी बढ़ने से संत-महंत सरकार पर जनसंख्या नियंत्रण को लेकर समय समय पर सरकार चेताते आए हैं।
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पिथौरागढ़ : जनसांख्यिकीय बदलाव ने बढ़ाई सीमांत के बाशिंदों की चिंता
जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) ने सीमांत के बाशिंदों की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई राज्यों के साथ ही नेपाल से आकर छोटा-बड़ा कारोबार शुरू कर रहे वर्ग विशेष के अपरिचित चेहरों के कारण चीन और नेपाल से लगे इस सीमांत जिले की संवेदनशीलता बढ़ गई है। इस डेमोग्राफिक चेंज से चिंतित सीमांत के लोगों ने नोटिफाइड एरिया फिर से जौलजीबी करने की मांग मुखर कर दी है।
असुविधाओं के पहाड़ से जिस तेजी से यहां के लोग शहरी क्षेत्रों के लिए पलायन कर रहे हैं उसी अनुपात में बाहर के लोग सीमांत के हर कस्बे तक पहुंचने लगे हैं। इनमें मजदूर से लेकर व्यापारी तक शामिल हैं। खुफिया एजेंसियां भी मानती हैं कि पिछले कुछ सालों में कारीगर, बारबर, सब्जी, मांस, फेरी व्यवसाय सहित अन्य छोटे-मोटे व्यापार में बाहर से आए लोगों की भीड़ बढ़ी है।
कबाड़ बीनने वालों की संख्या भी नगर और कस्बों में तेजी से बढ़ी है। बाहरी लोगों का पुलिस सत्यापन कर रही है। मकान मालिकों और व्यापारियों को भी नौकरों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद अधिकांश लोग बिना सत्यापन के घूमते नजर आते हैं। चीन और नेपाल सीमा से सटे धारचूला तहसील में वर्ष 1998 तक बाहरी लोगों के लिए प्रवेश आसान नहीं था। नोटिफाइड एरिया और इनर लाइन उस समय जौलजीबी में थी। यहां जाने के लिए पास जरूरी होता था।
दून में हाल में बसे लोगों और बस्तियों को किया जा रहा चिह्नित
राजधानी दून में हाल में बसे लोगों और बस्तियों को चिह्नित किया जा रहा है। जिलाधिकारी डा. आर राजेश कुमार ने बताया कि पिछले कुछ समय में नए लोगों और बस्तियों के बसावट में तेजी आई है। रिस्पना, बिंदाल के किनारे बस्ती बसाने के साथ ही कॉलोनियों और मोहल्लों में भी नए लोगों के बसने व संपत्ति खरीदने की जानकारी सामने आ रही है। वहीं, एसएसपी जन्मजेय खंडूरी ने बताया कि सभी बस्तियों में सत्यापन का अभियान चलाया जाएगा। यहां बसे कहां से आए हैं? उनके आने का उद्देश्य क्या है? मूल रूप से वो कहां के रहने वाले हैं? उनका रोजगार क्या है? उनकी दिनचर्या क्या है? क्या वो किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल तो नहीं हैं, जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।
चंपावत : जिले में जनसांख्यिकीय बदलाव के संकेत
चंपावत जिला नेपाल सीमा से लगा होने से सुरक्षा के मद्देनजर संवेदनशील है, लेकिन यहां जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) अप्रत्याशित नहीं है। जिले के पहाड़ी क्षेत्र में कोई मदरसा नहीं है, जबकि मैदानी क्षेत्र में भी महज एक मदरसा है। इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। इस जिले में ऑटोमोबाइल मिस्त्री, दर्जी, मीट कारोबार, बारबर, फेरी आदि कारोबारी क्षेत्र में एक वर्ग विशेष के श्रमिक अधिक हैं। वहीं खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक शासन से ऐसे कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जिले में अप्रत्याशित जनसांख्यिकी बदलाव के कोई संकेत नहीं हैं और न ही जमीन की खरीद फरोख्त में कोई बदलाव आया। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक जिले की कुल 259648 की आबादी में हिंदुओं की संख्या 249563 है।
बागेश्वर : जनसंख्या संतुलन बिगड़ने जैसी कोई बात नहीं
प्रदेश सरकार इन दिनों सूबे में जनसांख्यिकी संतुलन बिगड़ने की आशंका से चिंतित है। खुफिया तंत्र से इसकी छानबीन कराई जा रही है। बागेश्वर में जनसांख्यिकी संतुलन बिगड़ने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। खुफिया तंत्र के अनुसार जिले में समुदाय विशेष की ढाई से तीन हजार की आबादी काफी समय से रहती है। इन लोगों को मूल निवासी का दर्जा हासिल है। जिले में समुदाय विशेष की आबादी बढ़ने के कोई आंकड़े और सबूत नहीं मिले हैं।
अल्मोड़ा : बाहरी लोगों की संख्या में बीस फीसदी की वृद्धि
पर्वतीय क्षेत्र में भी जनसांख्यिकी में धीरे-धीरे बदलाव होना शुरू हो गया है। अल्मोड़ा में बाहरी हिस्सों से लोग पहुंच रहे हैं। भवन और जमीन खरीदकर यहीं रहने लगे हैं। ऐसे लोगों पर खुफिया एजेंसियां भी नजर बनाए हुए हैं। अल्मोड़ा नगर क्षेत्र का ही उदाहरण लें तो पिछले पांच सालों में बाहर से आए लोगों की बसासत में करीब बीस फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। अल्मोड़ा नगर में पूर्व तक पालिका क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या छह से सात हजार के करीब थी। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच सालों में विशेष वर्ग के लोगों की संख्या करीब एक हजार से डेढ़ हजार तक बढ़ी है। ये लोग यहां रोजगार की तलाश में आते हैं और कुछ समय बाद यहीं भूमि और मकान खरीदकर स्थायी रूप से बस रहे हैं। इसकी पुष्टि भी खुफिया सूत्र कर रहे हैं।
नैनीताल : मैदानी इलाकों में बढ़ी समुदाय विशेष की बस्तियां
नैनीताल में पहाड़ के अलावा मैदानी इलाकों में समुदाय विशेष के लोगों ने जमीनें खरीदी हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली, रामपुर, पीलीभीत और मुरादाबाद के लोगों ने यहां आकर घर बना लिए हैं। हल्द्वानी के गौलापार, लामाचौड़, रामनगर और कालाढूंगी क्षेत्र में विशेष समुदाय ने जमीनें खरीदीं हैं। वन क्षेत्र बागजाला में पहले जहां दो मकान थे। अब बड़ी बस्ती विशेष समुदाय की स्थापित हो गई है। रहमपुर, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत से विशेष समुदाय के लोग आकर किराए के कमरे में रह रहे हैं। कुछ लोगों ने अपना मकान बना लिया है।
कोरोना काल के बाद कर्फ्यू हटने पर दर्जनों बाहरी लोग फड़ ठेला लगाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र में एक नई मस्जिद भी बनाई गई हैं। आकलन है कि विशेष समुदाय ने तीन साल के दौरान दो गुना जमीनें खरीदीं हैं। जिले का कोई क्षेत्र अछूता नहीं है। डेढ़ गुना और दो गुना दाम पर जमीनें विशेष समुदाय ने खरीदी हैं। इस मामले में बगैर आंकड़ा एक रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। पहाड़ पर भी लोग जमीनें खरीदने में लगे हैं। दूसरे के नाम पर कुछ लोगों ने जमीन खरीद ली है।
ऊधमसिंह नगर : गोपनीय ढंग से हो रही है जांच
जिले में कुछ सालों से बाहरी जगहों से बड़ी संख्या में लोगों की बसासत हुई है। यूपी समेत अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में वर्ग विशेष के लोग आकर बसे हैं। यूपी और नेपाल सीमा से लगा होने की वजह से यूएस नगर बेहद संवेदनशील भी है। इसके अलावा छोटे-छोटे विवादों को धार्मिक रंग देने के कई मामले घट चुके हैं। चुनाव को लेकर बाहरी लोगों की बसासत को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। शासन की ओर से बाहरी लोगों की बसासत को लेकर मांगी रिपोर्ट पर गोपनीय ढंग से जांच कर आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। एसएसपी दलीप सिंह कुंवर का कहना है कि शासन की ओर से निर्देश मिले हैं। इस संबंध में जांच कराकर रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाएगी। (संवाद)
टिहरी में भी बढ़ सकता है जनसंख्या असंतुलन का खतरा
टिहरी जिले में भी जनसंख्या संतुलन बिगड़ने का खतरा मंडरा रहा है। जिला मुख्यालय स्थित बौराड़ी बाजार में ही देखें तो दिनों दिन नए लोग ठेली-फड़ डालकर सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण कर रहे हैं, जिससे आम लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरी, कारपेंटर और कबाड़ी आदि का काम करने की तलाश में भी बाहरी क्षेत्र के लोग यहां पहुंच रहे हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में बाहरी लोगों के जमीन खरीदने के मामले सामने आने पर स्थानीय लोगों के विरोध के चलते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि प्रशासन के पास जनसंख्या असंतुलन के कोई स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं है। डीएम इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि कहीं से जनसंख्या असंतुलन संबंधी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। संवाद
साल दर साल बढ़ रही एक समुदाय विशेष की जनसंख्या
उत्तरकाशी जनपद में एक समुदाय विशेष की जनसंख्या में साल दर साल वृद्धि हुई है। वर्तमान में पूरे जनपद में एक समुदाय विशेष की जनसंख्या छह हजार के करीब बताई जा रही है। हालांकि जनपद में एक समुदाय विशेष को कोई अलग मोहल्ला नहीं है। जनपद मुख्यालय में बने मदरसे को ही मस्जिद के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। जनपद में एक समुदाय विशेष की कोई नई बस्ती सामने नहीं आई है।
चमोली में नहीं है जनसांख्यिकीय असंतुलन की स्थिति
चमोली जिले में जनसांख्यिकीय असंतुलन की स्थिति फिलहाल नजर नहीं आ रही है। पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बताया कि शासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है, लेकिन जिले में फिलहाल कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है। न ही किसी ने इस तरह की शिकायत की है। फिर भी शासन के निर्देश के अनुसार मामले की पड़ताल की जा रही है। संवाद
पौड़ी जनपद में नहीं है इस तरह के बसावट की जानकारी
पुलिस विभाग ने जनपद में इस तरह के बसावट की जानकारी से इंकार किया है। साथ ही एसएसपी ने समुदाय विशेष को लेकर आदेश नहीं मिलने की बात कही है। वहीं जिला अर्थ एवं संख्या विभाग ने भी इस संबंध में जनगणना के बाद ही स्पष्ट जानकारी होने की बात कही।
रुद्रप्रयाग जिले में नहीं कोई मामला
जिले में जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने को लेकर कोई मामला नहीं आया है। साथ ही जमीन खरीदने को कोई प्रकरण नहीं आया है। जिले में जखोली ब्लॉक के कुछ क्षेत्रों में विशेष समुदाय के गांव हैं, जिनकी बसावट दशकों पुरानी है। वहां भी बाहर से किसी के जमीन खरीदने, मकान बनाने की जानकारी नहीं है। इधर, पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इन दिनों केदारनाथ यात्रा संचालन को लेकर प्राथमिकता से कार्य किया जा रहा है।