उत्तराखंडः वैज्ञानिकों की इस राय के बाद अब 'दिल्ली दूर नहीं'
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उत्तराखंड की वादियों में पहुंचने वाले सैलानियों की देहरादून से दिल्ली तक पहुंच आसान बनाने के लिए हाईवे के बीचोंबीच मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाना सबसे बेहतर विकल्प है।
यह मानना है आईआईटी के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन अरबन डिजाइन एंड डेवलपमेंट (सीयूडीडी) से जुड़े वैज्ञानिकों का। वैज्ञानिकों की राय में भूमि अधिग्रहण की तकलीफों के मद्देनजर दिल्ली-देहरादून हाईवे इस योजना के लिए मुफीद साबित हो सकता है। राजमार्ग के बीचोंबीच डिवाइडर का इस्तेमाल कर कॉरिडोर को विकसित किया जा सकता है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से रुड़की, हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून के बीच मेट्रो रेल सेवा विकसित किए जाने की कवायद चल रही है। इसी के मद्देनजर विगत 25 जनवरी, 2015 को तत्कालीन मुख्य सचिव एन रविशंकर ने आईआईटी में सीयूडीडी के उद्घाटन के दौरान उत्तराखंड में हाईस्पीड ट्रेन कॉरिडोर तथा स्मार्ट सिटी विकसित किए जाने पर मंत्रणा की थी।
संस्थान और शासन के बीच इन मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति के बाद भविष्य में इस पर काम किए जाने पर जोर दिया गया था। केंद्र से जुड़े वैज्ञानिक डॉ.एम परेडा का कहना है कि संस्थान में रेल रिसर्च पर काफी काम चल रहा है।
राज्य में मेट्रो सेवा के लिए अभी तक शासन की ओर से रोडमैप जारी नहीं किया गया है। लेकिन मेट्रो कॉरिडोर की संकल्पना काफी खर्चीली है, जबकि दिल्ली और देहरादून के बीच बढ़ते यातायात भार को देखते हुए इसके न केवल देहरादून से रुड़की के बीच बल्कि कम से मेरठ तक विस्तार किए जाने की जरूरत है।
प्रति किलोमीटर में 300 करोड़ रुपए का खर्च
मेट्रो कॉरिडोर योजना के लिए प्रति किलोमीटर 300 करोड़ रुपए तक के खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन एक बार इस योजना के स्थापित होने के बाद यह काफी फायदेमंद भी साबित होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार हाईवे के बीच में आठ से दस मीटर की चौड़ाई में कॉरिडोर का निर्माण किया जा सकता है। फिलहाल मेरठ तक इस योजना को तैयार करने के बाद दिल्ली तक इसके निर्माण की रूपरेखा बनाई जा सकती है।
सर्वे के बाद ठंडे बस्ते में यूपी की योजना
हाल ही में यूपी और उत्तराखंड सरकार के बीच हुई वार्ता के बाद गंगनहर के किनारे हरिद्वार से मेरठ तक मेट्रो कॉरिडोर बनाए जाने की योजना पर सहमति बनी थी। इसके लिए यूपी सिंचाई विभाग की ओर से छह माह पूर्व रुड़की से हरिद्वार के बीच गंगनहर के किनारे उपलब्ध भूमि की नापजोख भी की गई थी।
लेकिन इसके बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। यूपी सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सीबी यादव ने बताया कि सिंचाई विभाग ने भूमि की पैमाइश कराई थी। लेकिन योजना पर यूपी सरकार को निर्णय लेना है। अभी तक इस दिशा में कोई आदेश नहीं मिले हैं।
दिल्ली-देहरादून हाईवे पर पड़ने वाले पुलों पर व्यापक सर्वे की जरूरत होगी। उनके अनुसार हाईवे पर मेट्रो कॉरिडोर योजना बेहद लाभदायक साबित हो सकती है।
- डा. सतीश चंद्रा, वैज्ञानिक, ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, आईआईटी, रुड़की