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दिल्ली दरबार की दिल्लगी के जख्म

Tue, 17 Sep 2013 07:08 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 17 Sep 2013 07:08 PM IST
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delhi darbar ki dillagi

पिछले दिनों भाई लोगों के हालात बहुत बदतर थे। दिल्ली दरबार की दिल्लगी ने और सुलगा दिया। बदतर भी इस कदर कि इज्जत तो गई ही, किसी गली कूचे के शायर की तरह बेईज्जती का भी सत्यनाश हो गया।

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दिल्ली दरबार गए थे सुल्तान की सल्तनत बचाने और उलटे पैर भागना पड़ा। सियासी उठापटक के बीच पिछले दिनों आधा दर्जन माननीय दिल्ली पहुंचे। मुद्दा था हुकूमत बचाने का। लेकिन तीन दिन बीत गए और दिल्ली वालों ने मिलने का वक्त ही नहीं दिया।
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आइडिया आया कि देश के सबसे बड़ी पंचायत के परिसर में चलते हैं वहीं पर किसी से बात हो जाएगी, कम से कम अपने सूबे में वापसी होने पर कहने भर को कुछ तो रहेगा कि हम किसी से तो मिले। भले ही सड़क पर खड़े खड़े नमस्ते हुई हो।
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ब्लैक कैट पास फटकने नहीं दिया
बस फिर क्या था सामने से अम्माजी आती दिखी तो दूर से ही सारे दंडवत हो गए। क्योंकि ब्लैक कैट पास फटकने नहीं दे रहा था। अम्माजी ने तिरछी नजर की और पूछा यहां कैसे आए हो। माननीय बोले की फूड सिक्यूरिटी बिल की प्रोसिडिंग देखने आए हैं। बगल में खड़े एक नेताजी बोले कि अपनी विधानसभा में तो सीरियस रहते नहीं हो।


अम्माजी इतनी देर में आगे चली गई। फिर इन माननीयों को प्रदेश की इंचार्ज के हवाले कर दिया गया। इंचार्ज भी ठहरी अम्माजी की नजदीकी दरबारियों में से। फिर इंचार्ज महोदया ने कसकर डाटा और तुर्रम खां बने एक दो के तो चश्मे भी उतरवा दिए। इसके बाद वापस आना ही मुनासिब समझा। अब अपने सूबे में थू थू हो रही है। लोग कह रहे हैं कि सरकार की पैरोकारी करने गए थे किसी ने सीधे मुंह बात भी नहीं की।

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