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Dehradun: उत्तराखंड अब भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील, जोन छह में शामिल; सेंसर-सायरनों की संख्या बढ़ाई जाएगी

Sun, 30 Nov 2025 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 30 Nov 2025 03:37 AM IST
सार

उत्तराखंड समेत अन्य हिमालीय राज्यों को भी भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन छह में रखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य में निर्माण कार्यों के लिए लोगों को अधिक सजग होना होगा।
 

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Dehradun: Uttarakhand is now very vulnerable to earthquakes
demo - फोटो : पीटीआई

विस्तार

उत्तराखंड को भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन-छह में शामिल किया गया है। इससे पहले राज्य के जिलों को जोन चार और पांच में विभाजित किया गया था। अब भारतीय मानक ब्यूरो ने डिजाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के भूकंपरोधी डिजाइन के मानदंड रीति संहिता-2025 में नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया है। इसमें उत्तराखंड समेत अन्य हिमालीय राज्यों को भी भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन छह में रखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य में निर्माण कार्यों के लिए लोगों को अधिक सजग होना होगा।

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वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत के अनुसार, भारतीय मानक ब्यूरो भूकंपीय जोनिंग मानचित्र जारी करता है। इससे पहले वर्ष-2016 में इसे जारी किया गया था। अब करीब नाै वर्ष बाद जारी नए मानचित्र में सभी पहाड़ी राज्यों को समान रूप से जोन छह में शामिल किया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि भूकंप की दृष्टि से जो खतरा जम्मू-कश्मीर में है, वही उत्तराखंड में भी है। निदेशक गहलोत कहते हैं कि बड़े डैम, सड़क, इमारत आदि के निर्माण में इसका महत्वपूर्ण रोल होता है। अब पहाड़ी राज्यों के भीतर निर्माण कार्य में एकरूपता आएगी। इससे पहले जोन पांच में शामिल रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ भूकंप की दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील जिले थे।
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पृथ्वी की दृष्टि से हिमालय में कोई बहुत अंतर नहीं होता : बिष्ट
श्रीनगर गढ़वाल केंद्रीय विवि के भूगर्भ विभाग के विभागाध्यक्ष एमपीएस बिष्ट कहते हैं कि पृथ्वी की दृष्टि से हिमालय में कोई बहुत अंतर नहीं होता है। उनकी चट्टान, बाउंड्री, प्लेट आदि एक जैसी ही होती है। पहले जोनिंग हुई थी, उसमें राज्य को दो जोन में रखा गया था। अब एक ही जोन (छह) में रखा गया है। इसकी संवेदनशीलता बढ़ा दी गई है। ऐसे में हमें अधिक सजग होना होगा। उन्होंने बताया कि भूकंप की पूर्व घटना, तीव्रता समेत अन्य पहलुओं को शामिल करते हुए भूकंप की जोनिंग होती है।

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राज्य में सेंसरों, सायरनों की संख्या बढ़ाई जाएगी

भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार टकराव होता रहता है। इसके चलते भूकंप को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है। राज्य में 1911 से रिक्टर स्केल पर छह की तीव्रता से अधिक के 11 बड़े भूकंप आ चुके हैं। अब भूकंप के खतरे के दृष्टिगत राज्य में सेंसरों, सायरनों की संख्या बढ़ाने समेत अन्य कदम उठाए जाएंगे।

राज्य में 28 अगस्त 1916 के दिन सबसे बड़ा भूकंप आया था। इस दिन 6.96 तीव्रता का भूकंप मापा गया था। वहीं, अगर 1975 से 2024 के बीच 49 वर्षों की बात करें तो रिक्टर स्केल पर सात या उससे अधिक की तीव्रता वाला कोई भी भूकंप नहीं आया है। अधिकांश रिक्टर स्केल स्केल पर तीन से चार की तीव्रता वाले भूकंप आए हैं। इसमें तीन से चार की तीव्रता वाले भूकंप 320, चार से पांच वाले 90, पांच से छह के 34, छह से सात वाले तीन आए हैं।

सेंसरों की संख्या बढ़ाई जाएगी
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन कहते हैं कि भूकंप की आशंका के दृष्टिगत सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हाल में भूकंप को लेकर मॉक डि्रल कराई गई है। इसके अलावा भूकंप को लेकर सायरन और सेंसरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जन जागरूकता को लेकर भी कदम उठाए जाएंगे।

पहले दो जोन में रखा गया था राज्य को
पहले भूकंप की दृष्टि से राज्य को दो जोन में रखा गया था। इसमें सबसे अधिक संवेदनशील जोन पांच में रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ थे। जबकि जोन चार में उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल शामिल थे।

2021 में सबसे अधिक संवेदनशील जिलों में चार जिले शामिल थे
लोकसभा में वर्ष-2021 में दिए एक उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री ने भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील 38 शहर और कस्बों की जानकारी दी थी। इसमें अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून, रुड़की शामिल हैं।

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