दिल्ली में बढ़ा बाढ़ का खतरा: डाकपत्थर बैराज से यमुना में लगातार छोड़ा जा रहा पानी, धीरे-धीरे बढ़ रहा आगे
पछवादून व क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश से क्षेत्र की नदियां उफान पर हैं। यमुना व उसकी सहायक टोंस नदी, हिमाचल से आने वाली गिरी नदी, आसन नदी का पानी यमुना से मिलकर निरंतर दिल्ली की तरफ कूच कर रहा है।
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उत्तराखंड में बारिश ने पहाड़ से मैदान तक मुसीबत खड़ी कर दी है। विकासनगर में डाकपत्थर बैराज से यमुना नदी में लगातार छोड़ा जा रहा पानी धीरे-धीरे दिल्ली की तरफ कूच कर रहा है, जिससे वहां बाढ़ आने की संभावना प्रबल हो रही है। दरअसल बैराज से लगातार दूसरे दिन भी दस से बारह लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया।
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पछवादून व क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश से क्षेत्र की नदियां उफान पर हैं। यमुना व उसकी सहायक टोंस नदी, हिमाचल से आने वाली गिरी नदी, आसन नदी का पानी यमुना से मिलकर निरंतर दिल्ली की तरफ कूच कर रहा है। बताते चलें कि डाकपत्थर बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी की मात्रा चौबीस घंटे में दस से बारह लाख क्यूसेक तक पहुंच रही है जो दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात पैदा करने के लिए काफी मानी जाती है।
क्या है पानी के डिस्चार्ज का तरीका
डाकपत्थर बैराज की पानी रोकने की क्षमता 50 हजार क्यूसेक है। इससे अधिक जमा होने वाले पानी को बैराज के कुल 25 गेट के माध्यम से यमुना नदी में डिस्चार्ज कर दिया जाता है। बैराज के गेट में लगे सेंसर से हर आधा घंटा में निकले पानी की रिपोर्ट ली जाती है। बैराज से फिलहाल हर घंटे लगभग 60 हजार क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा जा रहा है जो बैराज से आगे चलकर और अधिक बढ़ जाता है।
यमुना में पानी की मात्रा बहाव के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है। इसलिए दिल्ली के संबंध में कोई अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। डाकपत्थर बैराज से अभी पानी का लगातार डिस्चार्ज किया जा रहा है। बैराज से संबंधित बिजली परियोजनाएं अभी बंद हैं।
- विमल डबराल, एपीआरओ, जलविद्युत निगम