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कोर्ट के आदेश पर भी पुलिस ने दर्ज नहीं किया केस

Thu, 07 Jul 2016 03:02 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 07 Jul 2016 03:02 PM IST
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dehradun police refuses court order

जब पुलिस कोर्ट के आदेशों को ही दरकिनार करना शुरू कर देगी तो आम आदमी की भला कौन सुनेगा। कुछ यही हाल है दून की मित्र पुलिस का, जो अब कोर्ट के आदेश पर भी मुकदमा दर्ज करने से कतरा रही है।

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नियमानुसार कोर्ट के आदेश के बाद 24 घंटे के भीतर केस दर्ज होना चाहिए, लेकिन पटेलनगर थाना पुलिस ने एक मामले में आदेश के डेढ़ महीने बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया है। वहीं, एक अन्य मामले में कोर्ट के आदेश के एक महीने बाद मुकदमा दर्ज हुआ है।
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अदालत का कहना है कि यह घोर आपत्तिजनक और न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद घातक है। क्यों न संबंधित थानाध्यक्षों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई शुरू की जाए।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय विनोद कुमार बर्मन ने बुधवार को न्यायालय कार्यालय का औचक निरीक्षण किया तो प्रथम सूचना रिपोर्ट और धारा 156 (3) से संबंधित रजिस्टर के अवलोकन में पाया कि कुछ मामलों में न्यायालय ने 156 (3) के प्रार्थना पत्र स्वीकारते हुए संबंधित थाने को अविलंब मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। अदालत ने इसे न्यायिक व्यवस्था के प्रति अत्यंत घातक बताया।

अदालत ने कहा कि कोर्ट के आदेश के एक महीने बाद रिपोर्ट दर्ज करना तत्कालीन थानाध्यक्ष के लापरवाही पूर्ण रवैये, न्यायालय के आदेश के प्रति अनादर भाव एवं घोर उदासीनता को प्रकट करता है।

अदालत ने मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष पटेलनगर व वर्तमान प्रभारी थानाध्यक्ष पटेलनगर को 13 जुलाई 2016 को कोर्ट में तलब करते हुए कहा कि वे इस दिन व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हों और लिखित स्पष्टीकरण दें। अदालत ने कहा कि आदेश के बावजूद मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट तय समय के भीतर क्यों दर्ज नहीं हुई। 

न्यायालय ने कमलेश की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156 (3) को स्वीकारते हुए 16 मई को थानाध्यक्ष पटेलनगर को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन न्यायालय को अब तक एफआईआर की प्रति नहीं मिली। जब इस मामले में अदालत ने थाना पटेलनगर के पैरोकार मोहम्मद कय्यूम से पूछा तो बताया कि उसने न्यायालय से प्राप्त आदेश की प्रति 18 मई को प्राप्त कर थाना पटेलनगर के हेड मोहरीर राजकुमार को मुकदमा दर्ज करने के लिए दे दी थी। लेकिन मामले में अब तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। 

प्रार्थी सौ सिंह की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को स्वीकारते हुए अदालत ने 11 जनवरी 2016 को थानाध्यक्ष पटेलनगर को अविलंब मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन न्यायालय के आदेश के एक महीने बाद 11 मार्च 2016 को मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। जबकि, 16 मार्च 2016 को एफआईआर की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की गई है। 


सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करे, जबकि कोर्ट के आदेश पर 24 घंटे के भीतर मुकदमा दर्ज हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है तो यह कोर्ट की अवमानना का मामला बनता है।
- सीएस तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता

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