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देहरादून: ऋषिकेश कोतवाल जोशी की पोस्टिंग विवादों में, 2020 से चल रही है विभागीय जांच

Sun, 19 Sep 2021 11:40 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 19 Sep 2021 11:40 AM IST
सार

इंस्पेक्टर महेश जोशी के खिलाफ वर्ष 2020 में तत्कालीन एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने जांच के आदेश दिए थे। उनके खिलाफ अभी जांच चल ही रही है। इस बीच शुक्रवार को उन्हें कोतवाल ऋषिकेश बनाया गया है।

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dehradun news: rishikesh Kotwal mahesh Joshi posting controversy, departmental inquiry on him since 2020
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

विभागीय जांच झेल रहे इंस्पेक्टर महेश जोशी की ऋषिकेश कोतवाल के रूप में ताजपोशी विवादों में आ गई है। उनके खिलाफ जांच पूरी नहीं हुई है। बावजूद उन्हें चार्ज दे दिया गया। इस मामले में डीआईजी गढ़वाल रेंज नीरू गर्ग ने जिला पुलिस से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।

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तत्कालीन एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने दिए थे जांच के आदेश
इंस्पेक्टर महेश जोशी के खिलाफ वर्ष 2020 में तत्कालीन एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने जांच के आदेश दिए थे। उनके खिलाफ अभी जांच चल ही रही है। इस बीच शुक्रवार को उन्हें कोतवाल ऋषिकेश बनाया गया है। शनिवार को डीआईजी नीरू गर्ग ने इस मामले को विवादित बताया और जिला पुलिस से जांच रिपोर्ट मांगी है।
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यह है मामला 
छह दिसंबर 2017 को तत्कालीन एसएसपी निवेदिता कुकरेती हरिद्वार से लौट रहीं थीं। उन्हें रास्ते में जाम मिला, पता चला कि वहां विशेष श्रेणी दरोगा अशोक कुमार की ड्यूटी थी, लेकिन वह मौजूद नहीं थे। एसएसपी ने उन्हें आरटी सैट के माध्यम से ही लाइन हाजिर होने का आदेश दे दिया। इसके बाद अशोक कुमार न तो थाने पहुंचा और न ही पुलिस लाइन। पता चला कि अशोक कुमार शर्मा छह दिसंबर से पहले से ही अनुपस्थित चल रहा था।
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अक्तूबर 2019 में शर्मा के बेटे के संबंध में एक मौखिक शिकायत तत्कालीन डीआईजी अरुण मोहन जोशी के पास आई। उन्होंने जब अशोक कुमार के बारे में जानकारी की तो पता चला कि वह तो लाइन हाजिर हो गया था, लेकिन अभी तक न तो उसकी लाइन में ही कोई एंट्री है और न ही थाने को कुछ मालूम। इस मामले की विभागीय जांच सीओ डालनवाला को सौंपी गई।

जांच में पाया गया कि थाना रायवाला ने अशोक कुमार की अनुपस्थिति में ही रायवाला से पुलिस लाइन जाना दर्शा दिया। जबकि, अशोक कुमार ने न तो लाइन में कोई आमद कराई और न ही अपनी अनुपस्थिति के बारे में कोई जानकारी दी। 31 जनवरी 2020 को अशोक कुमार सेवानिवृत्त भी हो गया। इस तरह गायब रहते ही उसने लगभग 25 माह का वेतन पुलिस महकमे से लिया।


अब नो वर्क नो पे का नोटिस अशोक कुमार को भेजा गया। साथ ही तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर महेश जोशी और मुंशी मनोज कुमार की लापरवाही सामने आई है। महेश जोशी ने लाइन रवानगी और अशोक कुमार की अनुपस्थिति के बारे में कोई जानकारी पुलिस अधिकारियों को नहीं दी। इस मामले में दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।

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