आयुध निर्माणी ने लॉन्च किए स्वदेशी उपकरण, अब दुश्मन पर रखी जा सकेगी सटीक नजर
अब हमारे जवान दुश्मनों पर न केवल पैनी निगाह रख पाएंगे, बल्कि दुश्मन पर और अधिक सटीक वार भी कर पाएंगे। यह सब होगा आत्मनिर्भर भारत के तहत आयुध निर्माणी देहरादून की ओर से तैयार विभिन्न डे और नाइट विजन उपकरणों से। मंगलवार को पूर्ण रूप से स्वदेशी 11 ऐसे उपकरणों को आयुध निर्माणी देहरादून ने लॉन्च किया।
आयुध निर्माणी के महाप्रबंधक पीके दीक्षित ने कहा कि यह उपकरण न केवल दुश्मनों पर और पैनी निगाह रखेंगे, बल्कि दुश्मन पर और सटीक वार भी किया जा सकेगा। यह उपकरण पहले विदेशों से काफी महंगे दामों में खरीदने पड़ते हैं।
टी-90 टैंक में उपयोग की जाने वाली जो दूरबीन यंत्र सेना विदेशों से 40 लाख रुपये में खरीदती थी, वह महज तीन लाख रुपये में बनकर तैयार हो गई है। यह डिवाइस पूरी तरह से भारतीय उपकरणों से तैयार की गई है। इसका वजन 4.6 किलोग्राम हैं। जिसमें कई लैंस लगे हैं।
इसके अलावा जूम टेलीस्कोप जो 7.62 एमएम गन के साथ उपयोग में लाई जाती है, उसका भी उत्पादन यहां किया जाने लगा है। इसे पहले रूस और अन्य देशों से मंगाना पड़ता था। जो करीब ढाई लाख है, लेकिन यहां केवल सवा लाख में मिलेगी।
इसके अलावा दूरबीन मोबाइल कैमरा रिकॉर्डर डिवाइस भी तैयार किया है। इसमें दूरबीन को मोबाइल से जोड़कर दूरबीन के जरिए दूर की गतिविधि को वीडियो कॉल के जरिए कहीं भी बैठे व्यक्ति को लाइव दिखाया जा सकता है।इस डिवाइस की कीमत महज दो हजार रुपये है।
पैसिव नाइट विजन दूरबीन भी अहम उपकरण
इसके अलावा पैसिव नाइट विजन दूरबीन भी अहम उपकरण है। जो हेलमेट में फिट की जाने वाली डिवाइस है। इससे रात को दूर तक दुश्मन की गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है। यह 2.90 लाख में सैन्य बलों को दिया जा रहा है। अभी तक यह डिवाइस विदेशों से तीन से साढ़े तीन लाख रुपये में खरीदी जा रही थी।
फिलहाल इस समय आयुध निर्माणी को 15 00 डिवाइस बनाने का आर्डर मिला है। इस दौरान अपर महाप्रबंधक कैलाश प्रसाद, एससी झा, आरसी शर्मा, संयुक्त महाप्रबंधक वीएस चौधरी, शर्मिला कौल, सौरभ भाष्कर वीरेंद्र यादव, रितेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
आम आदमी के लिए भी तैयार की दूरबीन
आयुध निर्माणी ने पहली बार सिविल के लिए पहली बाद उपकरण तैयार किया है। इसको दवीनेत्रा नाम दिया गया है। आयुध निर्माणी ने इसका परीक्षण कर इसका उत्पादन शुरू कर दिया है। यह दूरबीन यहां आने वाले ट्रेकरों, के साथ ही पक्षी प्रेमियों, जंगलों में जानकारी को देखने आदि के लिए मददगार साबित हो सकती है।
इसकी कीमत करीब 20 से 25 हजार रुपये तक है। यह पहली बार हुआ है जब, आयुध निर्माणी में सिविल क्षेत्र के लिए कोई उपकरण तैयार किया है। आयुध निर्माणी के महाप्रबंधक पीके दीक्षित ने बताया कि यह दूरबीन पहले सेना के लिए बनाया जाती थी, लेकिन आत्मनिर्भर भारत के तहत अब इसका निर्माण आम आदमी के लिए भी किया जाना लगा है।