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देहरादून: सचिवालय जा रहीं आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, पुलिस से नोकझोंक के बाद धरने पर बैठीं
Wed, 29 Sep 2021 10:24 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 29 Sep 2021 10:24 PM IST
सार
सीटू से संबद्ध आशा कार्यकत्री यूनियन से जुड़ीं आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर पिछले लगभग डेढ़ महीने से आंदोलनरत हैं। बुधवार को उन्होंने फिर सचिवालय कूच किया।
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आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मानदेय बढ़ोतरी समेत 12 सूत्री मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सचिवालय कूच किया। पुलिस ने सचिवालय से कुछ पहले बैरिकेडिंग लगाकर सुभाष रोड पर उन्हें रोक लिया। इसे लेकर पुलिस के साथ आशाओं की नोकझोंक भी हुई। बाद में आशाएं वहीं धरने पर बैठ गईं। देर शाम तक आशाएं धरने पर बैठी थीं।
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सीटू से संबद्ध आशा कार्यकत्री यूनियन से जुड़ीं आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर पिछले लगभग डेढ़ महीने से आंदोलनरत हैं। बुधवार को उन्होंने फिर सचिवालय कूच किया। पुलिस द्वारा रोकने पर वह सुभाष रोड पर धरने पर बैठ गईं। बाद में मुख्यमंत्री के ओएसडी मौके पर पहुंचे और आशाओं से वार्ता की। हालांकि, आशाएं लिखित आश्वासन मिलने तक वहां से न हटने के बात पर कायम थी। इस पर ओएसडी वापस चले गए।
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यूनियन की अध्यक्ष शिवा दूबे ने कहा कि आशा कार्यकर्ता पिछले लंबे समय से आंदोलनरत हैं। बीती नौ अगस्त को उनकी वार्ता स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी से भी हुई थी। जिनमें कुछ मांगों पर सहमति बनी थी। बाद में एनएचएम की मिशन निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक से भी वार्ता हुई। वार्ता में जिन मांगों पर सहमति बनी थी उन पर अब तक अमल नहीं किया गया है। ऐसे में आशाओं के पास आंदोलन जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं को भी सरकारी सेवक का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपए किया जाए। कोविड कार्य में लगी आशाओं को 50 लाख का बीमा व स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाए। कोरोनाकाल में मृतक आशाओं के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। सचिवालय कूच करने वालों में सुनीता चौहान, मीना जखमोला, आशा चौधरी, लोकेश देवी, मीनाक्षी, नीरा आदि शामिल रहीं।