फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   dehradun arvind book best selling book of the year.

करोड़ों का पैकेज छोड़ मन की सुनी और करोड़ों दिल पर किया राज

Sun, 06 Dec 2015 09:13 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 06 Dec 2015 09:13 AM IST
विज्ञापन
dehradun arvind book best selling book of the year.

देहरादून के इस युवा ने कंपनी निदेशक पद पर करोड़ों रुपए का पैकेज छोड़कर हाथ में कलम थाम ली, कुछ दिन मन लगाकर लिखा और आज अरविंद पाराशर सबके लिए मिसाल बन गए हैं।

विज्ञापन


अरविंद की पहली ही पुस्तक ‘कबीरा नॉट अंटिल आई डाई’ ने देशभर में युवाओं के बीच धमाल मचा दिया। पहली पुस्तक को शानदार कामयाबी मिलने से उत्साहित अरविंद दो नई पुस्तकें लिख रहे हैं। जल्द दोनों पुस्तकें पाठकों के हाथ में होंगी।
विज्ञापन


विजय पार्क निवासी स्व. बीएल शर्मा के बेटे अरविंद की प्राथमिक शिक्षा मार्शल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी पीजी कॉलेज से बीएससी किया। कंप्यूटर कोर्स करने के बाद कई कंपनियों में जॉब की।
विज्ञापन
विज्ञापन


आखिरी जॉब एक इंडो अमेरिकन कंपनी में बतौर डायरेक्टर की मिली, जिसमें एक करोड़ रुपए से अधिक पैकेज था। लेकिन अरविंद का दिल तो कलम में बसता था।

मन की करो तो पक्की है कामयाबी

dehradun arvind book best selling book of the year.

बचपन के दोस्त भी उनकी लेखनी के कायल थे। आखिरकार अरविंद ने जॉब छोड़कर लेखन में किस्मत अजमाने का कठिन फैसला लिया। लव, एडवेंचर और थ्रिल से भरपूर उनकी पहली पुस्तक ‘कबीरा नॉट अंटिल आई डाई’ की लांचिंग अक्तूबर 2014 में हुई। देखते ही देखते यह किताब युवाओं की पसंद बन गई।

क्रॉसवर्ड की शीर्ष 20 में अरविंद की पुस्तक देश में 12वें स्थान पर आ चुकी है। अमेजन वेबसाइट पर दो बार सेलिंग में शीर्ष पर पहुंच चुकी है। अरविंद ने बताया कि अमेजन पर उनकी बुक के 42 रिव्यू हैं, जिनमें 4.9 की रेटिंग मिली हुई है। इसकी सफलता के बाद अब अरविंद दो और पुस्तकें लिख रहे हैं। जल्द ही यह भी लांच की जाएंगी।

अरविंद का कहना है कि अक्सर मां बाप अपने बच्चों पर नौकरी करने का दबाव बनाते हैं। कई बार युवा घर की जिम्मेदारियों के दबाव में नौकरी करते हैं और अपने मन की सोच को दबा देते हैं।

अरविंद के दोस्त कोमल सिंह का कहना है कि वह बचपन से ही उन्हें लिखने को प्रेरित करते थे, लेकिन जिम्मेदारियों की वजह से अरविंद पहले लाइफ में कुछ करना चाहते थे।

आखिरकार उन्होंने अपने मन की सुनी और उनको बड़ी कामयाबी मिल गई। ऐसे तमाम उदाहरण देखने को मिलेंगे, जब किसी ने मन का किया और कामयाब हुए।

क्या है कहानी

dehradun arvind book best selling book of the year.

अरविंद की यह पुस्तक 70 के दशक की एक कहानी पर आधारित है, जब भारत के युवा रूस में अध्ययन के लिए जाते थे। ऐसा ही एक लड़का जब रूस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है तो उसे लगता है कि उसे पत्रकार बनना चाहिए।

पत्रकारिता का कोर्स करते वक्त उसे एक अफगानी लड़की से प्यार हो जाता है। बाद में एक प्रोफेसर पात्र कबीर को जासूस बनाकर अफगानिस्तान भेजता है। इस बीच कबीर को अहसास होता है कि वह जो कर रहा है गलत है, लेकिन तब तक बात बिगड़ चुकी थी।

उसे अपराध बोध होता है कि उसकी जासूसी की वजह से हजारों लोग लड़ाई में मारे जा रहे हैं। उसकी प्रेमिका नूश उसे इंडिया वापस जाने को कहती है, लेकिन वह लड़ाई की हानि कम होने तक वापस नहीं जाने की बात कहता है।

मजबूरी में नूश इंडिया आ जाती है, लेकिन वह लड़ाई रुकवाने के प्रयास में 10 साल जेल में रहता है। कबीर को यह आभास होता है कि नूश जिंदा है, जबकि नूश को यह अहसास होता है कि कबीर अब इस दुनिया में नहीं है। आखिर 10 साल बाद दोनों मिलते हैं और उनकी प्रेम कहानी पूरी होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed