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Dehradun News: ज्ञानी और सज्जन पुरुष कभी नहीं करता क्षमावृत्ति का त्याग
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Iविभिन्न मंदिरों में जैन धर्म के महान पर्व दशलक्षण का श्रद्धाभाव के साथ आयोजनI
जैन धर्म के महान पर्व दशलक्षण धार्मिक अनुष्ठान एवं श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महामंडल विधान शुरू हुआ। श्री दिगंबर जैन धर्मशाला समेत शहर के माजरा, राजपुर, क्लेमेंटटान आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-प्रक्षाल, शांति धारा आदि धार्मिक अनुष्ठानों को भक्तिभाव के साथ पूरा किया। इस मौके पर विकसंतसागर मुनिराज ने कहा कि ज्ञानी और सज्जन पुरुष कभी भी क्षमावृत्ति का त्याग नहीं करता है।
गांधी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन धर्मशाला में उत्तम क्षमा धर्म पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज विकसंत सागर मुनिराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का क्रोध ही महान शत्रु है। इसलिए सज्जन पुरुष क्रोध से दूर रहता है। ज्ञानी, सज्जन पुरुष को कोई शत्रु दुष्टता से मार दे तो भी क्षमावृत्ति का कभी त्याग नहीं करता है। जैसे कहा भी गया है कि बार-बार जलाए और तपाए जाने पर भी सोना अपने सौंदर्य को नहीं छोड़ता बल्कि जितना तपाया जाता है उतना ही चमकता है। बार बार घिसने पर भी चंदन अपना स्वभाव न छोड़कर सुगंध को ही फैला देता है। उसी प्रकार उत्तम पुरुषों की प्रकृति किसी भी अवस्था में विकारमय नहीं होती है। इस दौरान संध्याकालीन बेला में श्रीजी की भव्य आरती हुई। वहीं, दिगंबर जैन महासमिति महिला इकाई की ओर से दो ग्रुपों में धार्मिक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। इसमें 30 बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। मंच संचालन रीता जैन, मंजू जैन, शेफाली जैन एवं बबिता जैन ने किया। दोनों ग्रुपों के प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही श्रोताओं से प्रश्न पूछकर सही उत्तर मिलने पर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर उत्सव समिति के संयोजक संदीप जैन, अमित जैन, अर्जुन जैन, अजीत जैन ने सहयोग किया। वहीं, जैन मंदिर माजरा में संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत जैन मिलन सुभाष नगर ने जोड़ी कमाल की कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर मीडिया संयोजक मधु जैन, जैन समाज के अध्यक्ष विनोद जैन, नरेश चंद जैन, अंकुर जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, सनत जैन, वीणा जैन, ममलेश जैन, मधु जैन, पिंकी जैन आदि मौजूद रहे।
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जैन धर्म के महान पर्व दशलक्षण धार्मिक अनुष्ठान एवं श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महामंडल विधान शुरू हुआ। श्री दिगंबर जैन धर्मशाला समेत शहर के माजरा, राजपुर, क्लेमेंटटान आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-प्रक्षाल, शांति धारा आदि धार्मिक अनुष्ठानों को भक्तिभाव के साथ पूरा किया। इस मौके पर विकसंतसागर मुनिराज ने कहा कि ज्ञानी और सज्जन पुरुष कभी भी क्षमावृत्ति का त्याग नहीं करता है।
गांधी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन धर्मशाला में उत्तम क्षमा धर्म पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज विकसंत सागर मुनिराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का क्रोध ही महान शत्रु है। इसलिए सज्जन पुरुष क्रोध से दूर रहता है। ज्ञानी, सज्जन पुरुष को कोई शत्रु दुष्टता से मार दे तो भी क्षमावृत्ति का कभी त्याग नहीं करता है। जैसे कहा भी गया है कि बार-बार जलाए और तपाए जाने पर भी सोना अपने सौंदर्य को नहीं छोड़ता बल्कि जितना तपाया जाता है उतना ही चमकता है। बार बार घिसने पर भी चंदन अपना स्वभाव न छोड़कर सुगंध को ही फैला देता है। उसी प्रकार उत्तम पुरुषों की प्रकृति किसी भी अवस्था में विकारमय नहीं होती है। इस दौरान संध्याकालीन बेला में श्रीजी की भव्य आरती हुई। वहीं, दिगंबर जैन महासमिति महिला इकाई की ओर से दो ग्रुपों में धार्मिक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। इसमें 30 बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। मंच संचालन रीता जैन, मंजू जैन, शेफाली जैन एवं बबिता जैन ने किया। दोनों ग्रुपों के प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही श्रोताओं से प्रश्न पूछकर सही उत्तर मिलने पर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर उत्सव समिति के संयोजक संदीप जैन, अमित जैन, अर्जुन जैन, अजीत जैन ने सहयोग किया। वहीं, जैन मंदिर माजरा में संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत जैन मिलन सुभाष नगर ने जोड़ी कमाल की कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर मीडिया संयोजक मधु जैन, जैन समाज के अध्यक्ष विनोद जैन, नरेश चंद जैन, अंकुर जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, सनत जैन, वीणा जैन, ममलेश जैन, मधु जैन, पिंकी जैन आदि मौजूद रहे।
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