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मशीन खरीदने को करोड़ों, मरम्मत को सौ भी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 18 Aug 2016 12:35 PM IST
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दून अस्पताल
- फोटो : file photo
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज और टीचिंग अस्पताल में एक ओर जहां नई मशीनों को खरीदने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनकी मरम्मत के लिए मात्र कुछ सौ रुपये तक नहीं लगाए जा रहे हैं। इसके चलते तमाम मशीनें और उपकरण खराब पड़े हुए हैं।
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स्वीकृति मिलने के बाद से मेडिकल कॉलेज और टीचिंग अस्पताल में करोड़ों रुपये की खरीद हो रही है। इस खरीद पर कई तरह के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नियमों को दरकिनार कर चहेतों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
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आलम यह है कि अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से ऐसी ओटी टेबल और एनेस्थिसिया मशीनें खरीदी गई, जो पैकिंग खोलने के बाद से खराब पड़ी हुई है। इसके चलते अस्पताल में इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। खास बात है कि अस्पताल प्रबंधन मशीनें और उपकरण खरीदने पर तो करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है लेकिन उनकी एनुअल मेंटनेंस कांट्रेक्ट (एएमसी) पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा रहा है।
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क्या है एएमसी
एनुअल मेंटनेंस कांट्रेक्ट (एएमसी) एक तरह से बीमा या वारंटी है। एएमएसी के तौर पर विभाग हर वर्ष कुछ धनराशि जमा कराता है। इसके बाद एक निश्चित समय तक मशीन या उपकरण में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर उसकी मरम्मत मुफ्त की जाती है।
50 लाख की धनराशि
टीचिंग अस्पताल में मशीनों व उपकरणों की एएमसी के लिए मेडिकल कॉलेज को 50 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है। हालांकि यह धनराशि जस की तस पड़ी हुई है। आलम यह है कि अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, लिफ्ट, इंटरकॉम किसी की भी एएमसी नहीं हुई है।
अपनी जेब से कर रहे खर्च
एएमसी और मरम्मत मद में बजट न होने के चलते अस्पताल की तमाम मशीनों की मरम्मत के लिए धनराशि नहीं मिल पा रही है। चिकित्साधीक्षक डा. केके टम्टा अपनी जेब से मशीनों की मरम्मत पर पैसा खर्च कर रहे हैं। बुधवार को भी उन्होंने अपनी जेब से पैसे खर्च कर पानी की मोटर ठीक कराई। इससे पहले भी वह करीब डेढ़ लाख रुपये अपनी जेब से विभिन्न व्यवस्थाओं पर खर्च कर चुके हैं।