जानिए, कैसे बंदी को सुधारने गई महिला खुद हुई अपराध का शिकार
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तिहाड जेल में बंदियों को सुधारने गई एनजीओ संचालिका का जेल से रिहा होने के बाद एक बंदी ने अपहरण कर लिया और उसे छोड़ने के एवज में 20 लाख की फिरौती मांगी।
महिला के पति की तहरीर पर एसओजी और पुलिस की संयुक्त टीम ने दो दिन की भागदौड़ के बाद दिल्ली से महिला को सकुशल बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। एएसपी तृप्ति भट्ट ने बताया कि रोहित के खिलाफ दिल्ली और देहरादून में तीन मुकदमे दर्ज है। आरोपी पटेलनगर से चोरी और अपहरण के मामले में जेल जा चुका है। आरोपी को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पटेलनगर के टीएचडीसी कालोनी बंजारावाला निवासी आशीष बेनिवाल की पत्नी सौम्या एनजीओ चलाती हैं। एनजीओ जेलों में बंदियों के सुधार के लिए काम करता है। सौम्या ने अपनी टीम के साथ छह महीने पहले तिहाड़ जेल में बंदियों के जीवन में सुधार लाने के लिए काम किया था। उस समय रुड़की निवासी रोहित उर्फ अजय उर्फ मनोज कुमार भी जेल में बंद था।
जेल से रिहाई के बाद बढ़ाया मेल जोल
जेल से रिहाई के बाद रोहित ने सौम्या से मेलजोल बढ़ाया और फोन पर बात करने के साथ कई बार उसके घर तक भी आया। आरोप है कि दो दिसंबर को रोहित ने सौम्या को बहाने से रेलवे स्टेशन पर बुलाया और उसे जबरन दिल्ली लेकर चला गया।
दिल्ली में सौम्या को एक कमरे में बंद कर दिया और उसके पति को फोन करके अपहरण की जानकारी देते हुए रिहाई के बदले 20 लाख रुपये फिरौती मांगी। पति आशीष ने पुलिस की शरण ली। पुलिस ने सौम्या की गुमशुदगी को अपहरण में दर्ज कर एसओजी और पुलिस की संयुक्त टीम गठित की।
अपहरणकर्ता ने आशीष से पेशगी के रूप में एक लाख रुपये मेरठ आकर देने को कहा। इधर फोन पर हुई बातचीत के आधार पर पुलिस ने रोहित की लोकेशन ट्रैस कर ली।
लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम आशीष के साथ दिल्ली बस अड्डे पर पहुंची। तभी रोहित दिल्ली से मेरठ जाने वाली बस में दिखाई दिया। इस पर पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया। उसकी निशानदेही पर महिला को एक कमरे से बरामद कर लिया है।