{"_id":"57495eab4f1c1ba22c6935cc","slug":"vikas-nagar-loot-modus-operandi","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकासनगर लूटः लुटेरों को था पहाड़ में घिरने का डर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
विकासनगर लूटः लुटेरों को था पहाड़ में घिरने का डर
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 28 May 2016 02:33 PM IST
विज्ञापन
लूट
- फोटो : concept photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैंक का 18 लाख का कैश लूटने वाले बदमाशों को पहाड़ी क्षेत्रों में घिरने का डर था, इसलिए उन्होंने बैंक कर्मियों को घटनास्थल पर छोड़ने का रिस्क नहीं लिया।
विज्ञापन
वो जानते थे कि यदि लूट का शोर मच गया तो पहाड़ की सिंगल रोड से निकलना आसान नहीं होगा। मैदानी क्षेत्र में आने के बाद ही बदमाश उन्हें छोड़कर फरार हुए। माना जा रहा है कि लुटेरों को पूरे इलाके का भौगोलिक ज्ञान होने के साथ वारदात को पूरी योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया है।
विज्ञापन
नौगांव से लेकर नैनबाग, कैंपटीफॉल से लेकर कटा पत्थर तक का पूरा सफर पहाड़ियों से घिरा है। यमुना पुल पार करने के बाद एक-दो तीन राजमार्ग पूरी तरह सिंगल है। बदमाशों ने कैंपटीफॉल थाना क्षेत्र में बैंक मैनेजर वेदप्रकाश शर्मा और दफ्तरी विशाल को अपने कब्जे में कर कार कब्जा ली थी। बदमाशों ने घटनास्थल सुनसान होने के बाद भी बैंक कर्मियों को साथ लेकर चलना ही मुनासिब समझा।
विज्ञापन
बदमाश जानते थे कि यदि सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचने से पहले बैंक का कैश लूट होने की सूचना प्रसारित हो जाएगी तो वह अपने मकसद में कामयाब नहीं होंगे। इसलिए उन्होंने बैंक कर्मियों के साथ लेकर करीब 55 किलोमीटर का सफर तय किया। मैदानी क्षेत्र विकासनगर में शक्ति नहर की पटरी पर आने के बाद ही बैंक कर्मियों को छोड़ा।
बदमाशों के जाने के चार से पांच मिनट बाद ही पुलिस के इसकी सूचना भी मिल गई, लेकिन बदमाशों कहां गायब हो गए, पता नहीं चल सका। एसपी सिटी अजय सिंह की माने तो बदमाश पूरे इलाके से परिचित थे। बदमाश खुद ही बैंक कर्मियों की कार को चलाकर लाया था।
लूट ने बैंक प्रबंधन को किया कटघरे में खड़ा
18 लाख रुपये की सरकारी रकम को बिना सुरक्षा के ले जाने का रिस्क क्यों लिया गया? कैश वैन नहीं आई तो पुलिस की मदद क्यों नहीं ली गई? ऐेसे तमाम सवाल हैं, जो बैंक प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। अधिकारियों के पास फिलहाल इनका कोई जवाब नहीं है। कुछ दिन पहले भी इसी तरह 29 लाख रुपये जमा करने का रिस्क लिया गया था। माना जा रहा है कि बैंक से जुड़े किसी शख्स की मुखबिरी पर यह वारदात अंजाम दी गई है। पुलिस संदेह के दायरे में आए बैंक कर्मियों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
नौगांव की पंजाब नेशनल बैंक से कैश ट्रांसफर पहली बार नहीं हो रहा था। एक दो बार की बात छोड़ दें तो हर बार सरकारी रकम को बिना सुरक्षा के ले जाने का रिस्क उठाया गया। 18 लाख रुपये की रकम को देहरादून लाने के लिए कैश वैन से संपर्क साधा गया था, लेकिन सोमवार को कैश वैन उपलब्ध होने की बात सुनकर मैनेजर खुद ही प्राइवेट कार से दून के लिए रवाना हो गए।
मैनेजर के कैश लेकर निकलने की जानकारी बदमाशों को थी। बदमाशों की सेंट्रो कार बैंक के बाहर से उनके पीछे लग गई। सुनसान इलाका मिलते ही बदमाशों ने अपना टारगेट पूरा कर लिया था। एसएसपी डा. सदानंद दाते का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बैंक कर्मी की सांठगांठ के बिना संभव नहीं है।
बैंक कर्मियों को बताया तस्कर
बदमाशों ने कार में कब्जा करते हुए बैंक कर्मियों को तस्कर होने की बात कहकर आतंकित करने का प्रयास किया था। बार-बार यही कहते रहे कि तस्करी करते हो। पहले तो बैंक कर्मी समझ नहीं पाए कि वो कौन है, लेकिन कुछ देर बाद ही साफ हो गया था कि उनका इरादा कैश लूटना है। हवाई फायर करने के पीछे का मकसद यही था कि वो विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
जीरो पर दर्ज किया लूट का मुकदमा
टिहरी जिले के कैंप्टीफाल में हुई लूट की वारदात को विकासनगर पुलिस ने दर्ज कर लिया। बैंक मैनेजर की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने उसे कैंप्टीफाल थाने के लिए भेज दिया है। एसएसपी ने बताया कि दोनों जिले की पुलिस संयुक्त रूप से घटना का अनावरण का प्रयास करेगी। एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई में एसओजी और कई थानों की पुलिस को लगाया गया है।
पांच हो सकती है बदमाशों की संख्या
वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों की संख्या पांच या उससे अधिक होने की उम्मीद है। सीधे तौर पर लूट के दौरान चार बदमाशों की उपस्थिति साबित हुई है। कैश के बारे में मुखबिरी करने वाला के अलावा और भी कोई उनका मददगार हो सकता है। बातचीत में एक बदमाश मिश्रित पंजाबी भी बोल रहा था।