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'जनता की राय से ही बनेगी स्मार्ट सिटी'
अनिल चन्दोला /अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 12 Mar 2016 05:18 AM IST
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मीनाक्षी सुंदरम
- फोटो : अमर उजाला
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देहरादून में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी को लेकर लोग कई हिस्सों में बंटे हुए हैं। कुछ लोग चाय बागान में ग्रीन सिटी बनाने के पक्ष में हैं तो कुछ लोग इसके खिलाफ खड़े हैं। उनका तर्क है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर चाय बागान को उजाड़ने और खुर्द-बुर्द करने की साजिश रची जा रही है।
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दूसरी ओर चीन की तोंगझी विवि के इक्विटी शेयर पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। सवाल आईएमए और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों के पास चीन को निर्माण की अनुमति देने को लेकर भी उठाए जा रहे हैं। वहीं कुछ लोग स्मार्ट सिटी को लेकर चल रही वोटिंग में दूसरे राज्यों के लोगों को शामिल करने पर भी सवाल उठा रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता अनिल चन्दोला ने लोगों के इन सभी सवालों पर परियोजना के नोडल अधिकारी आर मीनाक्षी सुंदरम से जवाब मांगा। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-
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सवाल:- ग्रीन फील्ड में स्मार्ट सिटी का विरोध हो रहा है। इसका क्या करेंगे?
जवाब:- हम तो यह कह ही नहीं रहे कि ग्रीन सिटी में स्मार्ट सिटी बनेगी। हमने तो लोगों को छह अलग-अलग विकल्प दिए हैं। लोग अपनी पसंद के विकल्प पर वोट करें। जिन्हें ग्रीन फील्ड में स्मार्ट सिटी चाहिए या जिन्हें नहीं चाहिए। सबको वोट देने का अधिकार है।
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सवाल:- रेट्रोफिटिंग और रि डेवलपमेंट से सरकार दूर क्यों है?
जवाब- रेट्रोफिटिंग और रि डेवलपमेंट का विरोध नहीं है। चकराता रोड और डिस्पेंसरी रोड चौड़ीकरण के दौरान हम रेट्रोफिटिंग और रिडेवलपमेंट कर चुके हैं। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम में हम काम कर रहे हैं। रेट्रोफिटिंग में स्टॉक होल्डर की लिखित अनुमति चाहिए, जो आसान काम नहीं है।
सवाल:- ग्रीन फील्ड में स्मार्ट सिटी पर जोर क्यों है?
जवाब:- ऐसा नहीं है। हमने लोगों को अपनी तरफ से छह विकल्प दिए हैं। हम किसी को किसी एक विकल्प पर वोटिंग के लिए जोर नहीं डाल रहे हैं। लोग अपनी पसंद से वोट डाल सकते हैं।
सवाल:- स्मार्ट सिटी से चाय बागानों के उजड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है?
जवाब:- चाय बागान में लगातार कब्जे, अनियोजित व अनियंत्रित निर्माण कार्य हो रहे हैं। ऐसे में अगर उसे छोड़ भी देंगे, तब भी अगले पांच से दस साल में उसका अस्तित्व नहीं बचेगा। हम वहां नियोजित और वैज्ञानिक तरीके से निर्माण करेंगे।
सवाल:- इससे हरियाली को भी नुकसान पहुंचेगा?
जवाब:- हमने इस काम में एफआरआई से कंसल्टेंसी मांगी है। हम जितने पेड़ काटेंगे, उससे ज्यादा लगाएंगे। स्मार्ट सिटी में हरियाली को बढ़ावा दिया जाएगा। एफआरआई इस काम में हमारी मदद को तैयार है।
सवाल:- चीनी विवि को इक्विटी शेयर देने का विरोध हो रहा है?
जवाब:- देश के कई राज्यों में चीन की कंपनियां काम कर रही हैं। हरियाणा में एयरफोर्स मुख्यालय के पास चीन की कंपनी 1200 एकड़ में स्मार्ट टाउनशिप विकसित कर रही है। दिल्ली में ही दूसरे देशों की कंपनियां काम कर रही हैं। वैसे भी इक्विटी शेयर देने से राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ कम ही हुआ है।
सवाल:- आरोप लग रहे हैं कि स्मार्ट सिटी के लिए दूसरे राज्यों के छात्रों से वोटिंग कराई जा रही है?
जवाब:- प्राइवेट संस्थानों के साथ ही सरकारी कॉलेजों, दफ्तरों, इंदिरा अम्मा कैंटीनों, अस्पतालों और डीबीएस व डीएवी जैसी जगहों पर भी वोटिंग कराई जा रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में तीन दर्जन से ज्यादा क्योस्क लगाई गई हैं। वहां सभी वर्गों व क्षेत्रों के लोग वोट कर रहे हैं।
सवाल:- इस बार प्रोजेक्ट में क्या फोकस है?
जवाब:- हम लोगों की राय पर सबसे ज्यादा फोकस कर रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों से वोटिंग करवा कर किसी एक विकल्प पर सहमति बनाने का प्रयास है। इसके अलावा फाइनेंस प्लान भी बेहतर किया जाएगा।